15 दिनों के एकांतवास में गए भगवान जगन्नाथ, जाने क्यों पड़ जाते हैं बीमार

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June 11, 2025

15 दिनों के एकांतवास में गए भगवान जगन्नाथ, जाने क्यों पर जाते हैं बीमार

डेस्कः बुधवार को भगवान जगन्नाथ की स्नान पूर्णिमा मनाई गई। जिसमें उन्हे 108 घड़ों के पानी से स्नान कराया गया। इसके बाद अनासर काल के दौरान भगवान 15 दिनों के लिए बीमार पड़ जाते है। भगवान जगन्नाथ देव स्नान पूरे आस्था और विश्वास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को औषधीय जल से स्नान कराया गया।

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ओडिशा के पुरी धाम और रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर में स्नान यात्रा के बाद भगवान 15 दिनों के लिए एकांतावास में चले गए। मान्यता है कि इन 15 दिनों में भगवान बीमार पड़ जाते है और किसी भक्त को दर्शन नहीं देते है। 26 जून को नेत्रदान महोत्सव के साथ प्रभु के दर्शन फिर से भक्तों को होंगे। इसके अगले दिन 27 जून को रथ यात्रा निकाली जाएगी जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेंगे। वहीं 6 जुलाई को धुरती यात्रा निकाली जाएगी।

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भगवान क्यों पड़ते हैं बीमार
दरअसल, भगवान जगन्नाथ के बीमार पड़ने को लेकर एक महत्वपूर्ण कथा और मान्यता है जो बहुत ही दिलचस्प है। पुरी में माधव दास नामक एक भक्त रहते थे, जो भगवान जगन्नाथ की पूजा करते और उन्हीं के प्रसाद से अपना जीवन व्यतीत करते थे। एक बार माधव दास को बहुत ही तेज बुखार हो गया था। लेकिन, फिर भी उन्होंने ऐसी स्थिति में भक्ति में कोई कमी नहीं आने दी। लोग उन्हें वैद्य के पास जाने की सलाह भी देते थे, लेकिन वह कहते, ‘जब भगवान मेरा ख्याल रख रहे हैं, तो मुझे किसी और की जरूरत नहीं.’ फिर, एक दिन वह ज्यादा बीमार होने की वजह से अचानक बेहोश हो गए। तब स्वयं भगवान जगन्नाथ उनके पास आए और उनकी सेवा करने लगे।

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माधव दास के ठीक होने पर, जब उन्होंने भगवान को अपनी सेवा करते देखा, तो वह भावुक हो गए और पूछा कि आप मेरी सेवा क्यों कर रहे हैं? तब भगवान ने उत्तर देते हुए कहा कि, ‘मैं अपने भक्तों का साथ कभी नहीं छोड़ता, लेकिन कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ता है। तुम्हारी बीमारी के 15 दिन बाकी हैं, उसे मैं अपने ऊपर ले लेता हूं.’ आश्चर्य की बात यह है कि उस दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा थी। उस दिन से यह परंपरा आजतक चली आ रही है और हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान बीमार पड़ जाते हैं। उसके बाद वह 15 दिन के लिए एकांतवास में चले जाते हैं, जिसे ‘अनासर’ कहते हैं। फिर, भगवान जगन्नाथ के ठीक होने के बाद नैनासर उत्सव मनाया जाता है जिसे रथयात्रा कहते हैं।

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