रांचीः ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर प्राइवेट लिमिटेड के शराब बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सहायक उत्पाद आयुक्त के नेतृत्व में हुई छापेमारी में फैक्ट्री परिसर से 303 पेटी नकली विदेशी शराब और 70 लीटर बीयर जब्त की गई थी। बरामद शराब में आफ्टर डार्क, 8 पीएम और रॉयल मेंशन जैसे ब्रांड शामिल हैं। कार्रवाई के बाद सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह ने रांची उपायुक्त और उत्पाद विभाग को प्लांट का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा करते हुए पत्र भेजा है।
विभाग का कहना है कि जांच में फैक्ट्री के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल उत्पाद विभाग ने पूरे प्लांट को सील कर दिया है। इस मामले में फैक्ट्री के मालिक और आरजेडी के पूर्व विधानपार्षद सुबोध कुमार उर्फ सुबोध राय के साथ दो अन्य कर्मचारी रविकांत राय और देवेंद्र भगत को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में पेशी के बाद तीनों को बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

हर महीने 20 हजार पेटी शराब की होती थी बॉटलिंगः उत्पाद विभाग ने इस प्लांट को वर्ष 2019 में लाइसेंस दिया था। यहां हर महीने करीब 20 हजार पेटी अधिकृत शराब की बॉटलिंग होती थी। प्लांट की लागत करीब 12 करोड़ रुपए बताई जाती है। यहां 8 पीएम, वाइट मिसचीफ और आफ्टर डार्क ब्रांड की शराब की बॉटलिंग की जाती थी। जांच में सामने आया कि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर नकली शराब की बोतलें तैयार कर जा रही थीं। बोतलों पर सेल फॉर उत्तरप्रदेश और सेल फॉर दिल्ली का लेबल लगाया जाता था, ताकि उन्हें नकली होने का संदेह न हो। अब ओरमोझी थाना पुलिस यह पता चलगा रही है कि अब तक कितनी नकली शराब तैयार की गई और उसे किन-किन स्थानों पर खपाया गया।
2023 में भी हुई थी कार्रवाई, सील होने के बाद फिर खुला था प्लांटः यह पहली बार नहीं है जब इस प्लांट में अवैध गतिविधियां पकड़ी गई हैं। इससे पहले 19 मार्च 2023 को भी उत्पाद विभाग ने यहां छापेमारी की थी। उस दौरान एक 407 ट्रक, उक कार में लदी 108 पेटी एसी ब्लैक शराब, खाली बातलें और शराब बनाने की सामग्री जब्त की गई थी। तब भी चार लोगों को गिरफ्तार कर फैक्ट्री सील की गई थी और शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था। बाद में प्लांट को दोबारा संचालन की अनुमति मिल गई थी। हालांकि, इस बार विभाग का दावा है कि मिले साक्ष्य पहले की तुलना में अधिक मजबूत हैं, इसलिए लाइसेंस रद्द होने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
आटा चक्की में मजदूर था, बाद में सुबोध शराब कारोबार का बड़ा चेहरा बना
नकली शराब मामले में गिरफ्तार आरजेडी का पूर्व एमएलसी सुबोध राय के कारोबार की जांच बिहार के वैशाली जिले तक पहुंच गई है। वैशाली पुलिस उसके पुराने कोराबारी नेटवर्क और अवैध शराब कारोबार से जुड़े संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है। पुलिस अवैध शराब निर्माण और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुटी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब दो दशक पहले सुबोध राय प्रखंड क्षेत्र के अंधारी गाछी स्थित एक आटा चक्की में मजदूरी करता था। इसी दौरान उसने अपने एक संबंधी की मदद से देसी शराब के कारोबार में कदम रखा। शुरुआत में शराब की डिलीवरी और बिक्री का काम किया और धीरे-धीरे क्षेत्र में देसी शराक कारोबार का बड़ा नाम बन गया। बाद में उसने हरिहर चौक पर अंग्रेजी शराब की दुकान का लाइसेंस लिया। आरोप है कि इसी दौरान अवैध देसी शराब निर्माण का नेटवर्क भी संचालित होता रहा। इस अवधि में उसके भाई विकास कुमार का नाम भी शराब से जुड़े मामलों में सामने आया था और उसे जेल भी जाना पड़ा था।
राजनीति प्रभाव बढ़ा, 2016 में आरजेडी ने एमएलसी बनाया
राजनीकि रूप से सुबोध का प्रभाव तब बढ़ा, जब उसका संपर्क आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व से हुआ। इसके बाद 2016 से 2022 तक बिहार विधान परिषद का सदस्य रहा। उसका छोटा भाई विकास कुमार लगातार तीसरी बार पोझा पंचायत का मुखिया चुना गया है। एमएलसी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सुबोध ने अपने कारोबार का विस्तार किया। पहले शराब फैक्ट्री परिसर में हैचरी इकाई स्थापित की, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। इसके बाद एनएच-22 के पास बारिसपुर-गोढ़िया क्षेत्र में फ्लावर मिल, झोला, कार्टन और कंटेनर निर्माण से जुड़े उद्योग संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद गोढ़िया स्थित बीयर फैक्ट्री बंद हो गई थी।


