रांचीः झारखंड में पिछले आठ साल से जारी बालू का अकाल अब खत्म होने वाला है। रांची, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम के डीसी ने अपने-अपने जिलों के कुल छह सबसे बड़े बालू घोटों की लीज डीड पर अंतिम मुहर लगा दी है। इसके साथ ही इन तीनों शहरों में कानूनी तरीके से बालू खनन का रास्ता साफ हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक, पर्यावरण स्वीकृति के पेंच और जटिल ई-नीलामी प्रक्रिया के कारण यह मामला 2018 से लटका था। इसका फायदा माफिया उठा रहा था।
इन छह घाटों का कुल क्षेत्रफल 120.36 हेक्टेयर है। एक हेक्टेयर से सामान्य तौर पर करीब 5 लाख सीएफटी बालू निकलता है। यानी इन घाटों से 30 करोड़ सीएफटी बालू निकाला जाएगा। सरकार की कोशिश है कि 10 जून तक एनजीटी की रोक लगने से पहले ज्यादा से ज्यादा बालू का खनन कर स्टॉक कर लिया जाए, ताकि बरसात में सप्लाई न रुके। अब लीजधारकों को सरकारी रॉयल्टी और जीएसटी लेकर चालान काटना है। इससे सरकार को तो रॉयल्टी मिलेगी ही, बालू की कीमतों में भी कमी आएगी।रांची के सिल्ली क्षेत्र में श्यामनगर और चोकेसेरेंग बालू घाट की लीज को मंजूरी दी गई। वहीं बोकारो उपायुक्त ने पिछरी-2 और खेतको चालकारी बालू घाट के लिए लीज डीड पर हस्ताक्षर किए।जमशेदपुर उपायुक्त ने कोरेया मोहनपाल के दो बड़े क्षेत्रों के लिए लीज डीड पर हस्ताक्षर किए गए।


