रांची: जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी ने जेपीएससी परीक्षा में चयनित छात्रों को सार्वजनिक सूचना के माध्यम से नोटिस जारी किया है। अभ्यर्थियों को अपने ओएमआर शीट की कार्बन कापी का फोटो खींचकर सीआईडी को 30 जुलाई से पांच अगस्त के बीच भेजने के लिए कहा गया है। नोटिस को जेपीएससी के पोर्टल पर भी जारी किया गया है।सीआईडी ने नोटिस में बताया है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमिततओं के मामले में सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 में प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले का अनुसंधान चल रहा है।अनुसंधान के लिए ही झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या-01/2026) की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी अभ्यर्थियों से सीआईडी ने सहयोग मांगा है।

सीआईडी ने सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से अभ्यर्थियों से 30 जुलाई 2026 से पांच अगस्त 2026 के बीच पेपर-1 व पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कापी की पीडीएफ बनाकर या फोटो खींचकर सीआईडी को भेजने का अनुरोध किया है।इसके लिए सीआईडी ने वॉट्सऐप नंबर 99343-09058 और ईमेल आईडी कंप्लेनजेपीएससी-सीआईडी एट द रेट जेएचपुलिस डाट जीओवी डाट इन (complainjpsc-cid@jhpolice.gov.in) भी जारी किया है, जिसपर अभ्यर्थी उपरोक्त फोटो या पीडीएफ भेज सकते हैं।
सीआईडी ने यह भी कहा है कि अगर कार्बन कापी नहीं है तो रोल नंबर देते हुए अनुपलब्धता का कारण देकर वॉट्सऐप या ईमेल कर सकते हैं।
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से दूसरे दिन नौ घंटे तक पूछताछ, शुक्रवार को सीआईडी ने फिर बुलाया
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी एल. खियांग्ते से सीआईडी ने दूसरे दिन बुधवार को भी करीब नौ घंटे तक पूछताछ की है। सीआईडी की पूछताछ पूरी नहीं हो सकी है। उन्हें सीआईडी ने हाथों-हाथ फिर समन किया है और उन्हें शुक्रवार (31 जुलाई) को सीआईडी कार्यालय में फिर से उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
एल. खियांग्ते झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं। उनसे सीआईडी ने मंगलवार (28 जुलाई) को भी करीब साढ़े आठ घंटे तक पूछताछ की थी। दो दिनों की पूछताछ के दौरान सीआईडी ने उनसे 14वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान हुई गड़बड़ियों पर ही अधिकांश सवाल पूछा। परीक्षा संचालन में गड़बड़ी सामने आने के बाद उन्होंने क्या कार्रवाई की और गड़बड़ियां हुईं कैसे?
इतना ही नहीं, परीक्षा संचालन के लिए जिस एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को जिम्मा दिया गया था, वह झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में ब्लैकलिस्ट थी। ऐसी स्थिति में उसे काम देने की वजह क्या थी? क्या किसी का दबाव तो नहीं था? उसका सत्यापन क्यों नहीं किया गया।गड़बड़ियों को रोकने में विफल थे या उनकी सहमति से गड़बड़ियां हो रही थी, इस बिंदु पर सीआईडी लगातार सवाल दाग रही है।
सीआईडी को शक है कि जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा में अनियमितता कर भारी संपत्ति अर्जित की है और भ्रष्टाचार के पैसे से विदेश का भ्रमण किया है। इसी सूचना पर सीआईडी ने उनके पासपोर्ट को जब्त किया है और उनकी विदेश यात्राओं को खंगाल रही है।
रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किए गए पांचों आरोपित, दो दिन और पूछताछ की ली अनुमति
जेपीएससी मेधा घोटाला में रिमांड पर लिए गए पांच आरोपित जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी व दोनों तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान व एबाद की पांच दिनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सीआईडी ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। सीआईडी ने सीआईडी की रांची स्थित विशेष अदालत से रिमांड अवधि बढ़ाने का आग्रह किया। सीआईडी के आग्रह पर सभी पांचों आरोपितों से और दो दिनों तक रिमांड पर पूछताछ की अनुमति मिल गई है।इसके अलावा एजेंसी टीडीपीएल के गिरफ्तार तीन आरोपित कर्मी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह व संजय कुमार से भी रिमांड पर पूछताछ चल रही है। सभी आरोपितों से डेटा टेंपरिंग, ओएमआर शीट में हेराफेरी, अनियमितता पर आधारित सवाल पूछे जा रहे हैं।


