रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग भर्ती मामले में सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि अभ्यर्थियों ने पैसे देकर डीएसपी और डिप्टी जेलर के पदा हासिल किये। 11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान सिंडिकेट के सरगना अभय तिवारी ने आयोग के सदस्यों और अध्यक्ष के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये वसूले थे। इस पैसे के बदले इंटरव्यू में अंक बढ़वाये गये थे।
सीआईडी को मिले बयानों के अनुसार, बिचौलिए ब्रज कुमार राम ने इंटरव्यू में अभ्यर्थी मनीष कुमार के 80 अंक बढ़वाये, जिसके बाद उसका चयन डीएसपी पद पर हुआ। इस काम के बदले ब्रज कुमार राम को पांच लाख रुपये मिले थे। इसी सेटिंग के जरिये मनीष कुमार के अलावा रॉबिन कुमार और शैलेश सिन्हा भी डीएसपी बने, जबकि राजेश कुमार रजक का चयन डिप्टी जेलर के पद पर हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि सीडीपीओ परीक्षा में भी चार उम्मीदवारों की सेटिंग करायी गयी थी।इसके लिए प्रति अभ्यर्थी 20 लाख रुपये की रकम तय होने की बात कही गई। जांच के अनुसार, चारों अभ्यर्थी बाद में सफल भी हुए. इनमें प्रमोद पाठक का नाम भी शामिल है।






