झारखंड में चुनाव कार्य से हटाए जा सकते हैं डीजीपी अनुराग गुप्ता, एक IAS पर भी बवाल

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October 5, 2024

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DGP Anurag Gupta: झारखंड में चुनाव से पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता को चुनाव कार्य से हटाए जा सकता है। उनके विरुद्ध चल रही जांच को देखते हुए ऐसा निर्णय लिए जाने की संभावना है। संभावना है कि विधानसभा चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद इस संदर्भ में निर्वाचन आयोग अपना आदेश जारी कर सकता है।

विवादों में रहे 1990 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी अनुराग गुप्ता को वर्ष 2019 में भी आरोपों के कारण चुनाव कार्य से अलग रखने का आदेश दिया गया है। हाल ही में झारखंड हाई कोर्ट ने कोलकाता कैश कांड में डीजीपी अनुराग गुप्ता की भूमिका की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता राजीव कुमार की रिश्वत की रकम के साथ कोलकाता में गिरफ्तारी में गुप्ता की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

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ईडी ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि राजीव कुमार को रिश्वत का प्रलोभन देकर कोलकाता बुलाने और वहां पुलिस के हाथों गिरफ्तार करा देने के पीछे बड़ी साजिश रची गई थी। अनुराग गुप्ता के विरुद्ध इसी तरह का एक अन्य मामला राज्यसभा हॉर्स ट्रेडिंग से संबंधित है।

वर्ष 2016 में गुप्ता पर आरोप लगा था कि उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट के लिए बड़कागांव की तत्कालीन कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को प्रलोभन दिया था। इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रेस सलाहकार अजय कुमार भी आरोपित हैं।

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आईएएस मंजूनाथ भजंत्री भी निशाने पर

डीजीपी के अलावा रांची के नवनियुक्त उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री भी चुनाव कार्य से हटाए जा सकते हैं। देवघर के उपायुक्त पद पर रहने के दौरान उनके विरुद्ध गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी।

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इसके बाद चुनाव आयोग ने उन्हें चुनाव कार्य से हटाने का निर्देश जारी किया था। चुनाव आयोग ने उनकी नई नियुक्ति के संदर्भ में मुख्य सचिव को पत्र भेजकर जवाब मांगा है। कहा गया है कि हाई कोर्ट से उन्हें बगैर आयोग की अनुमति के चुनाव कार्य में नहीं लगाने का निर्देश दिया है। 15 दिन के भीतर आयोग ने मुख्य सचिव से इस संदर्भ में जवाब मांगा है।

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पत्र में हाई कोर्ट के उस आदेश का भी हवाल दिया गया है, जिसमें अदालत ने निर्वाचन आयोग की अनुशंसा को सरकार को मानने की बाध्यता की बात कही है। अदालत ने कहा है कि सरकार के पास यह विकल्प नहीं है कि वह निर्वाचन आयोग के अनुशंसा को माने या नहीं माने। संविधान में निहित अधिकारों के तहत आयोग की अनुशंसा सरकार को माननी पड़ेगी। आयोग ने मंजूनाथ भजंत्री को चुनाव कार्यों से दूर रखने की अनुशंसा सरकार से की थी। उक्त आदेश राज्य सरकार और केंद्र सरकार के अधिकारियों पर लागू होती है।

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