बिना नोटिस के गिरफ्तारी पर भड़का हाई कोर्ट, जगन्नाथपुर थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को सुनाई सजा

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December 18, 2024

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झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने बिना नोटिस के गिरफ्तारी करने पर जगन्नाथपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरिदेव प्रसाद और एएसआइ राजीव कुमार रंजन को एक-एक साल की साधारण सजा सुनाई है।

खंडपीठ ने दोनों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन का दोषी मानते हुए सजा के साथ दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, जिसे छह माह में पूरा कर लिया जाए। कोर्ट ने उनकी सजा अभी निलंबत रखी है, ताकि दोनों सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर सकें।

इसको लेकर इरशाद रजी और फैज अहमद की ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अर्नेश बनाम बिहार सरकार के मामले में दिशा निर्देश दिया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में  कहा है कि अगर आदेश का उल्लंघन होता है, तो पीड़ित हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है। प्रार्थी को बिना 42 ए का नोटिस दिए बिना ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज  या था। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

प्रार्थी इरशाद आनलाइन कामर्शियल कंपनी फ्लिपकार्ट और मंत्रा के डिलिवरी करने वाली पार्टनर से जुड़ा हुआ है। हटिया के रहने वाले दीपक कुमार ने डिलिवरी एजेंट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि उसने फ्लिपकार्ट से सामान डिलीवरी की बात करते हुए उससे ओटीपी देने का दबाव बनाया था। जबकि उसने कोई सामान फ्लिपकार्ट से नहीं मंगाया था।

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डिलिवरी एजेंट को जगन्नाथपुर थाना में बुलाया गया था। काफी देर होने के बाद अपने कर्मचारियों का हालचाल जानने के लिए इरशाद भी वहां पहुंच गया। लेकिन पुलिस ने बिना किसी प्रक्रिया का पालन किए ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। 15 दिनों बाद उसकी जमानत निचली अदालत से हुई।

सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2014 के अर्नेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार केस के गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा गया था कि सीआरपीसी की धारा 41ए के नोटिस के बगैर सात साल से कम सजा वाले मामले में पुलिस सीधे किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। इसे लेकर प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।

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