सोशल मीडिया पर एक दावा वायरल हो रहा है कि भारत सरकार 500 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगाने वाली है, जिससे काले धन पर रोक लग सके। यह दावा एक पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की तस्वीरों के साथ एक ग्राफिक साझा किया गया था।
इसमें लिखा था कि सरकार 500 रुपये के नोटों को बंद करने की तैयारी कर रही है। इस पोस्ट को प्रिया पुरोहित नामक यूजर ने शेयर किया, जिसमें उन्होंने ‘क्यों?’ लिखकर हैरानी जताई थी। यह देखकर दूसरे इंटरनेट यूजर्स भी हैरान रह गए और सवाल करने लगे।
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने इस दावे को पूरी तरह से झूठा करार दिया है। पीआईबी ने साफ किया कि केंद्र सरकार की ओर से ऐसा कोई ऐलान नहीं किया गया है और यह जानकारी फर्जी है। इस फैक्ट चेक को एक्स पर पोस्ट किया गया, जिसमें फर्जी ग्राफिक पर फेक का स्टैंप लगाया गया है।
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इस घटना से पता चलता है कि कैसे सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएं तेजी से फैल सकती हैं, जिससे आम जनता में भ्रम और अफरातफरी मच सकती है। पीआईबी ने लोगों से अपील की है कि वित्तीय नीतियों से जुड़ी कोई भी जानकारी केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।
सरकार ने पहले भी साफ किया है कि मुद्रा नीतियां केवल RBI और वित्त मंत्रालय के माध्यम से घोषित की जाती हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे पीआईबी, आरबीआई की वेबसाइट या सरकारी ऐप्स से ही अपडेट लें। इस घटना से सबक लेते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी फर्जी कंटेंट पर सख्ती बरतनी चाहिए।
फर्जी खबरों के खिलाफ लड़ाई में पीआईबी जैसी संस्थाएं अहम भूमिका निभाती हैं, लेकिन जनता की जिम्मेदारी भी है कि वे कोई भी जानकारी शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचें। अगर ऐसी अफवाहें फैलती रहीं तो बैंकिंग सिस्टम में अनावश्यक दबाव पड़ सकता है, जैसा कि 2016 की नोटबंदी के दौरान देखा गया था।
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