रांचीः जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में धांधली की जांच कर रही सीआईडी ने बड़ा खुलासा किया है। सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि सिंडिकेट का पूरा वित्तीय लेनदेन रांची के एक मकान सागर पैलेस से संचालित होता था। यह मकान टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर और घोटाले के मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने किराए पर ले रखा था। अभ्यर्थियों से उगाही गई मोटी रकम, एजेंटों का कमीशन और हिस्से का बंटवारा यहीं होता था। यानी इस सागर पैलेस को सिंडिकेट ने वसूली और बंटवारे का कंट्रोल रूम बना रखा था।
सीआईडी के मुताबिक उसके पार्टनर उमेश कुमार ने पूछताछ में यह खुलासा किया है। उमेश सरगना अभय तिवारी का काफी करीबी और सिंडिकेट का एजेंट है। वह नामकुम के तेतरी टोली का रहने वाला है। वहीं अभय तिवारी ने भी नामकुम के जोरार में आलीशान मकान बना रखा है। एक ही इलाके में रहने के कारण दोनों संपर्क में आए। उमेश ने सीआईडी को बताया था कि उसकी और अभय तिवारी की सामन्य जान-पहचान नहीं थी, बल्कि दोनों पार्टनर थे।

उमेश ने माना, वह अभय तिवारी का था पार्टनर
एक और खुलासा, अभय के टीडीपीएल के आई कार्ड पर उमेश का मोबाइल नंबर
सीआईडी ने कोर्ट को बताया है कि जब टीडीपीएल के रांची कार्यालय पर छापेमारी की गई थी, तब वहां अभय तिवारी और उमेश कुमार के आईकार्ड और विजिटिंग र्काउ मिले थे। अभय के टीडीपीएल के आई कार्ड पर उमेश कुमार का मोबाइल नंबर दर्ज था। सीआईडी ने जब कॉल डिटेल रिकार्ड की जांच की तो पता चला कि अभय तिवारी, उमेश कुमार और टीडीपीएल के कर्मचारी संपर्क में थे और लेनदेन का तालमेल बैठा रहे थे। उमेश कुमार को सीआईडी ने उसके दो सहयोगियों बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार के साथ चार अगस्त को रांची में गिरफ्तार किया था। बुद्धेश्वर व रमेश ने बताया था कि अभ्यर्थियों से डील के बाद उनका मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, चेक, हस्ताक्षरित कोरा स्टाम्प पेपर और हस्ताक्षर किया हुआ कागज अपने पास रख लेते थे।
उमेश व रमेश ने की अभ्यर्थियों से वसूली, सीटीओ ने किया प्रमाणित
गिरफ्तार आरोपी उमेश कुमार और रमेश कुमार ने बिचौलिए की भूमिका निभाते हुए अभ्यर्थियों से करीब 1.10 करोड़ रुपकी की अवैध वसूली की थी। सीआईडी की पूछताछ में उमेश कुमार और रमेश कुमार दोनों ने ही अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने और अभय तिवारी तक पहुंचाने की बात स्वीकार की है। सीआईडी को मुख्य सरगना अभय तिवारी और नेटवर्क के अन्य सदस्यों के साथ आरोपियों के सीडीआर लिंकेज भी मिले हैं। सीआईडी ने इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को साइबर सेल से मुख्य तकनीकी अधिकारी से प्रमाणित भी कराया है, जिससे दोनों की इस वसूली में सीधी भूमिका की पुष्टि हो गई है।
एजेंट को हर अभ्यर्थी पर मिलता था पांच लाख का कमीशन
सीआईडी की पूछताछ में उमेश कुमार ने स्वीकार किया कि जनवरी 2026 में मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी ने उससे 14वीं जेपीएससी परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने को कहा था। इस खेल में बकायदा वर्गवार रेट तय किए गए थे। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 1 करोड़ रुपए और आरक्षित वर्ग के लिए 80 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि तय थी। इस अवैध सौदेबाजी में उमेश कुमार सहित सभी एजेंटों को प्रत्येक अभ्यर्थी की व्यवस्था करने के एवज में 5 लाख रुपए का सीधा कमीशन देने का वादा किया गया था। रमेश कुमार के बयान से यह भी उजागर हुआ कि उसने 4 अभ्यर्थियों से करीब 40 लाख रुपए एकत्र किए और कमीशन काटकर बाकी रकम अभय तिवारी तक पहुंचाई।




