पलामूः जिस दवा को सरकारी डॉक्टर का लिखा समझ, सरकार के अस्पताल से ले कर खुद को और होने वाले बच्चे को सेहतमंद होने का एहसास करते थीं गर्भवती महिलाएं वो दवा ही नकली निकली । एक दो नहीं कई दवाईयां झारखंड के सरकारी अस्पतालों में ये कह कर दी जा रही है कि इससे शरीर में विटामिन की कमी दूर होगी और ये गोलियां सरकार के ही लैब में फेल हो रही है । यकीन करना मुश्किल है कि देश की नामी-गिरामी फॉर्मा कंपनियां नकली दवाइयों को सरकार के अस्पतालों में पहुंचा रही है और केंद्र से लेकर राज्य तक का स्वास्थ्य विभाग छिंदवाड़ा जैसी घटना होने का इंतजार कर रहा है ।
पलामू के सरकारी अस्पतालों नकली दवा सप्लाई?
खबर पलामू की है जहां औषधि विभाग की टीम ने जब सरकार के स्टोर में दवाइयों की जांच करवाई तो चौंकाने वाला रिपोर्ट केंद्रीय लैब से आई । राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के जिला वेयरहाउस पलामू में भंडारित कैल्शियम और विटामिन D3 की टैबलेट Aemcal-D3 को केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला की जांच में मानक गुणवत्ता से कम (Not of Standard Quality) पाया गया है। यानी जिन दवाइयों को खरीदने में सरकारी खजाने से लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं उन दवाइयों में खाने से फायदा से ज्यादा नुकसान की संभावना है ।
विटामिन और कैल्सियम के टैबलेट टेस्ट में फेल?
पलामू में D3 की टैबलेट Aemcal-D3 और कैल्शियम की जिन दवाइयों को लैब टेस्ट में फेल पाया गया है उसकी निर्माता कंपनी है Vzoic Healthcare Pvt. Ltd… Plot No. 236, Ind. Area, Phase-IX, S.A.S. Nagar, Mohali- पंजाब। सिर्फ मोहाली की Vzoic ही नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश की Mercury Pharamaceuticals भी विटामिन D3 बना तक झारखंड भेजती है जिसका नमूना भी फेल पाया गया है । बात यहीं खत्म नहीं होती है । रुड़की की दवा बनाने वाली कंपनी Helax Health Care Private Limted ने भी यही टैबेलट झारखंड को सप्लाई किया और इसका भी नमूना फेल पाया गया ।
गर्भावस्था में ही दी जा रही नकली दवाइयां?
जरा सोचिए कुपोषण से ग्रसित झारखंड की महिलाओं को गर्भावस्था में दी जाने वाली सबसे जरुरी दवा जिस पर मां-बच्चे का स्वास्थ्य निर्भर है उसमें ही घपला किया जा रहा है । एक दो कंपनियां नहीं बल्कि कई कंपनियों की विटामिन और कैल्सियम की टैबलेट्स जांच में भी फेल होती रही लेकिन ना तो सरकारी खरीद रुकती हुई दिख रही है और ना ही नकली दवा बनाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई होती हुई नजर आ रही है ।
खरीदी गई करोड़ों की दवा ?
सूत्रों के मुताबिक पलामू कि जिन विटामिन की गोलियों को लैब टेस्ट में फेल पाया गया उसकी खरीद के लिए 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की गई । ये दवाईयां बनती तो झारखंड के बाहर लेकिन खरीदी गईं जमशेदपुर के एक स्टॉकिस्ट से ।
कई जिलों में नकली दवा का जाल
मामला सिर्फ पलामू का ही नहीं है, कई जिलों के सरकारी भंडारण में दवाईयों को मानक गुणवत्ता से कम पाया गया है। आम बोलचाल की भाषा में इसे नकली दवाइयां ही कहा जा सकता है । मिसाल के तौर पर कोडरमा में Azen-20 टैबलेट्स भी जांच में फेल हो गई । इसे बनाती है Zoic Biotech लिमिटेड, मोहाली, पंजाब की कंपनी । कंपनी पर क्या कार्रवाई हुई ये किसी को मालूम नहीं।
कंपनी पर कार्रवाई से डरती है सरकार ?
झारखंड में सरकारी खरीद के साथ-साथ निजी दुकानों में बेची जाने वाली सैकड़ों दवाइयां लैब टेस्ट में फेल हो रही है लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य है । जाहिर है दवाईयां जब्त होती हैं, लैब रिपोर्ट भी आती है लेकिन जिन्हें कार्रवाई करनी है वो या तो फाइल पर कुंडली मार कर बैठ जाते हैं या फिर दवा माफिया के डर से कार्रवाई करने से खौफ खाते हैं।




