सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आलोक अराधे और पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली के नामों की सिफारिश शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत किए जाने के लिए केंद्र से की है। हालांकि, पांच जजों की कॉलेजियम में शामिल वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बीवी नगरत्ना ने जस्टिस पंचोली की नियुक्ति के खिलाफ असंतोष का एक मजबूत नोट दर्ज कराया है।
उन्होंने अपने नोट में यह तथ्य रेखांकित किया कि जस्टिस पंचोली की शीर्ष अदालत में नियुक्ति न केवल न्याय के प्रशासन के लिए अनुपयोगी होगी, बल्कि कॉलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता को भी दांव पर लगाएगी। जस्टिस नागरत्ना के असहमति नोट में जस्टिस पंचोली के गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट में तबादले की परिस्थितियों का भी जिक्र किया गया है।
पांच सदस्यीय कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जेके महेश्वरी और खुद जस्टिस नागरत्ना शामिल थीं। कॉलेजियम में जस्टिस पंचोली के नाम पर जस्टिस नागरत्ना की असहमति के बाद 4-1 के मत विभाजन के साथ फैसला लेते हुए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पोन्नत करने की सिफारिश की। कॉलेजियम में शीर्ष अदालत में अकेली महिला न्यायाधीश ने जस्टिस पंचोली की पदोन्नति का विरोध कर एक दुर्लभ स्थिति पैदा की है।
जस्टिस पंचोली अगर शीर्ष अदालत में पदोन्नत किए जाते हैं तो वह 2 अक्टूबर 2031 को जस्टिस जॉयमाल्या बागची की सेवानिवृत्ति के बाद उसी साल अक्टूबर में देश का प्रधान न्यायाधीश (CJI) बनने की कतार में होंगे। केंद्र की मंजूरी मिलने पर जस्टिस पंचोली 3 अक्टूबर 2031 को CJI का कार्यभार संभालेंगे और 27 मई 2033 को सेवानिवृत्त होंगे।
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, जब मई में कॉलेजियम ने पहली बार जस्टिस पंचोली को प्रमोट करने के लिए उनके नाम पर चर्चा की थी, तब उस समय भी जस्टिस नागरत्ना ने उनके नाम पर अपनी असहमति जताई थी। तब गुजरात हाई कोर्ट से जस्टिस एनवी अंजारिया के नाम की सिफारिश की गई थी, जो जस्टिस पंचोली से वरिष्ठ थे।
जस्टिस बेली एम त्रिवेदी के रिटायरमेंट के बाद से इस हाई कोर्ट का प्रतिनिधित्व शीर्ष अदालत में नहीं था। जानकार के मुताबिक, जब तीन महीने बाद दोबारा कॉलेजियम में जस्टिस पंचोली के नाम पर चर्चा शुरू हुई तो इससे जस्टिस नागरत्ना आश्चर्यचकित हो गईं और उन्होंने अपना लिखित अंसतोष जाहिर कर दिया।
जस्टिस नागरत्ना ने अपनी असहमति नोट में जुलाई 2023 में जस्टिस पंचोली को गुजरात हाई कोर्ट से पटना हाई कोर्ट तबादला करने की परिस्थितियों का भी जिक्र किया और बताया कि यह एक नियमित कदम नहीं था लेकिन उच्चतम स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ऐसा किया गया था।
उन्होंने कहा कि तब कई न्यायाधीशों से इस पर राय मांगी गई थी, जिनमें से सभी ने उनके हस्तांतरण के साथ सहमति व्यक्त की थी। जस्टिस नागरत्ना ने कॉलेजियम से आग्रह किया था कि 2023 में जस्टिस पंचोली के ट्रांसफर से जु़ड़े गोपनीय दस्तावेजों को देखा जाए।




