भारतीय क्रिकेट प्रशासन को दशकों तक दिशा देने वाले पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी आई.एस. बिंद्रा का 25 जनवरी 2026 को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल क्रिकेट जगत बल्कि प्रशासनिक और खेल प्रबंधन की दुनिया को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
आई.एस. बिंद्रा का क्रिकेट प्रशासन से जुड़ाव वर्ष 1975 से शुरू हुआ, जो चार दशकों से अधिक समय तक चला। वे वर्ष 1978 से 2014 तक लगभग तीन दशकों तक पंजाब क्रिकेट संघ (PCA) के अध्यक्ष रहे। 2015 में उन्हें PCA का चेयरमैन चुना गया। उनके सम्मान में मोहाली स्थित PCA स्टेडियम का नाम बदलकर पंजाब क्रिकेट संघ आई.एस. बिंद्रा स्टेडियम रखा गया, जो उनके योगदान की स्थायी पहचान है।
Deepest condolences on the passing of Mr. I S Bindra, former BCCI president and a stalwart of Indian cricket administration. May his legacy inspire future generations. Om Shanti 🙏
— Jay Shah (@JayShah) January 25, 2026
1980 के दशक में बिंद्रा भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह के विशेष सचिव भी रहे। क्रिकेट प्रशासन में उनका सबसे बड़ा योगदान 1987 के रिलायंस विश्व कप के सफल आयोजन में रहा। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के टेलीविजन बाजार को खोलने में अहम भूमिका निभाई, जिससे भारत की आर्थिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रतिष्ठा में जबरदस्त इजाफा हुआ।
आई.एस. बिंद्रा वर्ष 1993 से 1996 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष भी रहे। एन.के.पी. साल्वे और जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर उन्होंने 1987 और 1996 क्रिकेट विश्व कप की मेज़बानी भारतीय उपमहाद्वीप को दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इसके अलावा, वे शरद पवार के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के प्रधान सलाहकार भी रहे।
हालांकि, अपने करियर के दौरान उन्हें कुछ विवादों का भी सामना करना पड़ा, जिनमें मैच फिक्सिंग प्रकरण के दौरान ललित मोदी के समर्थन और क्रिकेट साउथ अफ्रीका के सीईओ पद के लिए हारून लॉर्गेट के समर्थन को लेकर आलोचना शामिल है। इसके बावजूद, भारतीय क्रिकेट के ढांचे को मजबूत करने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
आई.एस. बिंद्रा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की परिकल्पना और गठन में सलाहकार की भूमिका में भी शामिल रहे। 2014 में क्रिकेट प्रशासन से संन्यास लेने के बाद भी उनका प्रभाव और विरासत भारतीय क्रिकेट में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उनके निधन पर खेल जगत की कई हस्तियों, प्रशासकों और खिलाड़ियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। आई.एस. बिंद्रा को भारतीय क्रिकेट के उस युग के अग्रदूत के रूप में याद किया जाएगा, जिसने खेल को प्रशासनिक मजबूती और आर्थिक सशक्तता दी।


