लोहरदगा : जिले के उग्रवाद प्रभावित पेशरार थाना क्षेत्र की दिल दहला देने वाली घटना में चार साल बाद न्याय मिला है। 15 मार्च 2021 की उस काली रात को अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपित सच्चू महतो को लोहरदगा जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय नीरजा आसरी की अदालत ने उम्रकैद और 10,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत का यह फैसला सुनते ही मृतका के परिजनों की आंखें भर आईं। गांव में भी लोगों ने राहत की सांस ली और कहा कि यह फैसला घरेलू हिंसा व अपराधियों के लिए बड़ा सबक है। इस मामले में लोक अभियोजक भारत राम ने गवाहों और साक्ष्यों को मजबूती से अदालत में पेश किया। उनकी दलीलों ने आरोपी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
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घटना जिसने दहला दिया था इलाका
चार साल पहले हुए इस दर्दनाक हत्या कांड को आज भी लोग नहीं भूल पाए हैं। घरेलू विवाद के बाद गुस्से में सच्चू महतो ने अपनी पत्नी की निर्ममता से हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित ने शव को घर में बंद कर फरार हो गया। सुबह जब घर से कोई आवाज नहीं आई तो स्वजन पहुंचे। दरवाजा खुलवाने पर बेटी की लाश देखकर सभी के होश उड़ गए। पूरे गांव में मातम और सन्नाटा पसर गया था।
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चार साल तक चला मुकदमा
हत्या के बाद स्वजनों ने पेशरार थाना में कांड संख्या प्राथमिकी दर्ज कराया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चार वर्षों तक चले मुकदमे में 10 गवाहों के बयान दर्ज हुए। गवाहों की गवाही और पुलिस के ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने पत्नी की हत्या के आरोपित सच्चू महतो को दोषी करार दिया।
स्वजनों ने कहा – अब आत्मा को मिली
न्यायालय से फैसला आने के बाद मृतका के स्वजनों ने कहा कि बेटी अब लौटकर नहीं आएगी, लेकिन अदालत के इस फैसले से उन्हें राहत मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि अदालत का यह फैसला समाज में अपराधियों के लिए चेतावनी है और न्याय में विश्वास को मजबूत करता है












