रांचीः केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के स्वदेश देर्शन 2.0 योजना के तहत झारखंड के रूरल टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य के पांच आदिवासी बहुल जिलों के सुदूरवर्ती पहाड़ी गांवों में होम स्टे बनाए जाएंगे। इससे जहां इन आदिवासी गांवों का विकास होगा, वहीं देशी-विदेशी पर्यटक गांव की ताजी हवा का आनंद ले सकेंगे। उन्हें यहां धुसका, घुघनी, मडुआ लड्डू जैसे देशी खान-पान मिलेंगे। आदिवासी समाज और उनकी संस्कृति को भी नजदीक से जान सकेंगे। इसके लिए पश्चिमी व पूर्वी सिंहभूम, लातेहार, खूंटी और रांची जिले में ऐसे पहाड़ी गांवों की तलाश चल रही है।
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प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत इन जगहों पर होम स्टे बनाए जाएंगे। सारंडा और दलमा इलाकों में भी होम स्टे बनाने की तैयारी है। होम स्टे के तहत दो कमरों के परंपरागत मकान बनाए जाएंगे। इसे बनाने के लिए आदिवासी परिवार को सरकार की ओर से पांच लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित इलाके में परंपरागत पुराना कच्चा मकान है तो उसके नवीनीकरण के लिए भी 3 लाख रुपए तक की मदद मिलेगी।
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इस योजना की शुरूआत पश्चिमी सिंहभूम जिले के डीसी चंदन कुमार ने कर दी है। जिले के सभी बीडीओ को निर्देश है कि इस योजना में कोई इच्छुक आदिवासी परिवार है तो चिन्ह्रित करें। इसकी जानकारी भेजें, ताकि इसे पर्यटन निदेशालय को भेजा जा सके। इससे रोजगार सृजन होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। पश्चिमी सिंहभूम के जिला नोडल पर्यटन अधिकारी मार्कोस हेंम्ब्रम ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम्य संस्कृति व परंपराओं को जीवित रखते हुए आर्थिक विकास करना है। साथ ही हस्तकला और आदिवासी खान-पान को भी जीवंत रखना है।
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देशभर में एक हजार होम स्टे बनाए जाएंगे
यह योजना केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पहल है। ग्रामीण व पहाड़ी इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की संयुक्त भागीदारी होगी। स्वदेश दशर्न योजना के तहत देश भर में कुल 1000 होम स्टे बनेंगे। पूर्वोत्तर भारत के अलावा ओडिशा में यह योजना शुरू हो चुकी है। वहां परंपरागत तौर तरीकों के साथ पुराने गांवों को जीवंत गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है।






