रांचीः असम में विधानसभा का चुनाव 2027 में होना है उससे पहले ही वहां चुनावी माहौल तैयार हो गया है। इस बार चुनाव मैदान में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी अपनी ताकत दिखाने वाले है। सोमवार को हेमंत सोरेन दो दिवसीय असम के दौरे पर गए। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा से वो चुनावी मैदान में दो-दो हाथ करने को तैयार है। हिमंता बिस्व सरमा को उनके घर में भी चुनौती देने की तैयारी हेमंत सोरेन कर रहे है। फरवरी में हेमंत सोरेन ने असम के तिनसुकिया में एक सभा को संबोधित किया था जिसमें भारी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए थे। एक बार फिर से हेमंत सोरेन असम के दौरे पर है। सोमवार को उन्होंने सबसे पहले कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति बनाई।असम के सोनितपुर जिले में आदिवासी समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पारंपरिक तौर पर स्वागत किया।

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सेामवार को हेमंत सोरेन ने जय भारत पार्टी के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। हेमंत सोरेन ने कहा कि आपके वरिष्ठ नेताओं ने हमसे संकर्प किया था। असम राज्य में गरीब-गुरबा-पिछड़े-दलित-आदिवासी-अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को लेकर आप लोगों का लंबा संघर्ष चला आ रहा है। कई राजनीति उतार-चढ़ाव आप लोगों ने देखा है, हजारों वर्षो से आप सिर्फ असम नहीं इस देश का एक ऐसा व्यापार जगत का अभिन्न अंग है, कि आप लोगों ने अपना हाथ खींच लिया तो व्यापार खत्म हो जाएगा। आज देश का चाय उद्योग सिर्फ आदिवासियों के बदौलत चलता है। आज आप लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए प्रदीप नाग जी ने अपना दम तोड़ दिया। इसी तरह झारखंड में भी अपने जड़-जंगल-जमीन के लिए सालों साल तक संघर्ष हुआ। संघर्ष करते करते थक गए, बाद में शिबू सोरेन जैसे कई क्रांतिकारी नेताओं ने ये निर्णय लिया कि हम अपना अलग राज्य बनाएंगे। लेकिन ये संकल्प बहुत लंबा संकल्प है। इसका बिगुल फूंका गया था धनबाद जिले से कि हम अलग राज्य बनाएंगे। हमारे नेताओं-कार्यकर्ताओं ने भी संकल्प लिया।
असम में आपके स्वागत एवं प्रेम से अभिभूत हूँ 🙏🙏 pic.twitter.com/vAuEJlMUBa
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) March 10, 2026
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आज यहां के आदिवासी समाज जो कई हजारों वर्षो से यहां पर है, मुझे ये बात समझ में नहीं आती है, कि यहां के आदिवासी भाई बिहार-बंगाल-ओडिशा-झारखंड से लोग आकर बसे है तब से जब बंगाल और बिहार अलग नहीं हुआ था। आप लोग तैयार है तो इंकलाब जिंदाबाद कहकर आगे बढ़िया। असम में एक बड़ा धरा बहुत सारे यातनाओं से गुजर रहा है। अलग-अलग समय काल में आप लोगों का राजनीतिक उपयोग किया गया। आज इतना बड़ा समूह हक अधिकार की लड़ाई लड़ रहा है। जो आज यहां सत्ता में काबिज है, ये लोग देने वाला नहीं है, ये लोग व्यापारी है, ये लोग जबतक आप लोगों के साथ फायदा नहीं देखेगा तब तक आपका साथ नहीं देगा। बड़ी चालाकी से आदिवासी-दलित-पिछड़े-अल्संख्यक को हमे कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। अलग-अलग समय में आप सब लोगों का राजनीतिक उपयोग किया गया। हम लोग ऐसे खून का कतरा है कि हमलोगों ने कभी पीठ नहीं दिखाया। इतिहास गवाह है कि आदिवासी समाज कभी किसी की गुलामी नहीं की है। हमें पता है कि हक अधिकार कैसे लिया जाता है। आज ईडी-सीबीआई के नाम पर राजनीति वर्चस्व कायम किया जाता है, हम लोग उससे डरने वाले नहीं है, हमें छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं। हमें राजनीति लड़ाई ही नहीं कानूनी लड़ाई भी लड़नी होगी।
असम की जनता को जोहार… pic.twitter.com/6g52S1qnqP
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) March 10, 2026
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हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि इस बार ऐसा प्रयास होगा कि मौजूदा सत्ता को पता चल जाएगा कि राजनीति सिर्फ उन्हें ही नहीं आती। हमारे आदिवासी भाई-बहनों की एकजुटता एक प्लेटफॉर्म पर रहे तो निश्चित रूप से बड़े बदलाव होंगे। आने वाले समय में आप लोगों को आदिवासी का दर्जा कैसे मिले इसका रास्ता बनेगा और इसमें हम आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। जब बंगाल-ओडिशा-बिहार अलग नहीं हुआ था तब से आप यहां है, हम संविधान पीठ में जाकर आपकी लड़ाई लड़ेंगे। पहले हम अपना अधिकार लेंगे। बड़ा लक्ष्य लेकर चले अबुआ दिशोम अबुला राज्य।











