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हेमंत सोरेन को जन्मदिन पर दिशोम गुरु की आ रही है याद, कहा- वह मेरे साथ नहीं हैं, बहुत कष्टकारी क्षण है यह

हेमंत सोरेन को जन्मदिन पर दिशोम गुरु की आ रही है याद, कहा- वह मेरे साथ नहीं हैं, बहुत कष्टकारी क्षण है यह

रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद इन दिनों नेमरा में है। 10 अगस्त को हेमंत सोरेन का जन्मदिन हैं लेकिन पिता के निधन की वजह से वो शोक में है। एक तरफ गुरुजी के श्राद्धकर्म की तैयारी हो रही है दूसरी ओर अपने जन्मदिन के मौके पर हेमंत सोरेन अपने पिता शिबू सोरेन को याद कर रहे है।

हेमंत सोरेन 50 वर्ष के हुए, 10 अगस्त 1975 को नेमरा में हुआ था जन्म, बर्थ डे पर शिबू सोरेन को इस तरह कर रहे हैं याद
मुख्यमंत्री के 50वें जन्मदिन पर शिबू सोरेन साथ नहीं है। पिछले 50 सालों से हेमंत सोरेन को पिता का आशीर्वाद मिलता है, पहली बार पिता के बिना जन्मदिन में सबकुछ सुना सुना सा है। मुख्यमंत्री इन खास दिन अपने पिता को लेकर बहुत भावनात्मक हो गए है। उन्होने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज बाबा बहुत याद आ रहे हैं। मुझे जीवन देने वाले मेरे जीवनदाता, मेरी जीवन की जड़ें जिनसे जुड़ी हैं, वही मेरे साथ नहीं हैं। बहुत कष्टकारी क्षण है यह।
जिनकी मजबूत उंगलियों ने बचपन में मेरे कदमों को थामा, जिनके संघर्ष और लोगों के प्रति जिनके निश्चल प्रेम ने मुझे संवेदनशीलता के साथ जीना सिखाया, हर कठिनाई को सहजता से अवसर में बदलना सिखाया और जब भी राह में अंधेरा हुआ, दीपक बनकर मुझे आगे बढ़ने का रस्ता दिखाया, वह बाबा दिशोम गुरुजी प्रकृति का अंश बनकर सर्वत्र हो गए हैं।
आज बाबा भले ही सशरीर साथ नहीं हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि वे सूरज की हर रोशनी में हैं, हर पेड़ की छाया में हैं, हर बहती हवा में हैं, हर नदी की धार में हैं, हर उस अग्नि की लौ में हैं, जिसमें उन्होंने मुझे सत्य, संघर्ष, कभी न झुककर – निडर होकर जन-जन की सेवा करने की शिक्षा दी।
मेरे बाबा के आदर्श, विचार और शिक्षा की सीख मेरे लिए सिर्फ पुत्र धर्म नहीं, सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने मुझे अपने लोगों से जुड़ना सिखाया, मुझे बताया कि नेतृत्व का अर्थ शासन नहीं, सेवा होता है। आज जब मैं अपने राज्य की जिम्मेदारी उठाता हूं, तो उनकी बातें, उनकी आंखों का विश्वास, उनकी मेहनत और संघर्ष से सना हुआ चेहरा, लोगों की पीड़ा खत्म करने वाला दृढ़विश्वासी मन, शोषितों-वंचितों और आदिवासी अस्मिता को मुख्यधारा में लाने का संकल्प, मुझे हर निर्णय में मार्गदर्शन देता है।
बाबा अब प्रकृति में हैं। अब इस मिट्टी में हैं, हवा में हैं, जंगलों में हैं, नदियों में हैं, पहाड़ों में हैं, गीतों में हैं – उन अनगिनत लोककथाओं की तरह, जो हमेशा अजर-अमर रहती हैं।
बाबा मुझे गर्व है कि मैं आपकी संतान हूं, मुझे मान है कि मैं वीर योद्धा दिशोम गुरुजी का अंश हूं।
वीर दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें!
वीर दिशोम गुरु शिबू सोरेन जिंदाबाद!
जय झारखण्ड!

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