रांची: देश में उद्योगों की जननी कही जानेवाली एचईसी यानी हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन लिमिटेड अब खुद को बचाने के लिए अपनी जमीन का सहारा ले रही है। आर्थिक तंगी से जूझ रही कंपनी के प्रबंधन ने स्मार्ट सिटी को अपनी जमीन बेचने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। एचईसी प्रबंधन ने इसके लिए भारी उद्योग मंत्रालय और राज्य सरकार से अनुमति मांगी है।
अगर इस प्रस्ताव को अनुमति मिल जाती है, तो पहले चरण में 1000 एकड़ जमीन बेचेगा। जमीन बेचने को लेकर एचईसी व स्मार्ट सिटी प्रबंधन के बीच बातचीत भी हुई थी। स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने कंपनी से 500 एकड़ जमीन मांगी थी। मामला फाइनल होने पर एचईसी को 500 एकड़ जमीन के एवज में करीब 5500 करोड़ मिलेंगे। इससे कर्मचारियों का बकाया और आधुनिकीकरण का काम हो सकेगा।
एचईसी प्रबंधन ने वर्ष 2009 में राज्य सरकार को कुल 2342.03 एकड़ जमीन बेची थी। इसपर नया टाउनशिप विकसित हो रहा है। स्मार्ट सिटी टाउनशिप भी 656 एकड़ जमीन पर है। अब इसमें एचईसी की 500 एकड़ जमीन और जुड़ जाएगी तो आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र भी विकसित हो पाएंगे। एचईसी क्षेत्र में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि, ग्रेटर रांची में विधानसभा, राजभवन, हाईकोर्ट बन गया है।
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नया सचिवालय, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवास बनाने की तैयारी है। इसके अलावा एचईसी प्रबंधन ने सीआइएसएफ को 158 एकड़ जमीन आवंटित किया है। इसके अलावा लीज पर 313.31 एकड़ जमीन दे रखी है। एचईसी के पास अभी करीब 3500 एकड़ जमीन है। जमीन मिलने से नई आबादी की बसावट की जा सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने एचईसी प्रबंधन को साफ कह दिया है कि अब उसे कोई नया आर्थिक पैकेज नहीं दिया जाएगा। केंद्र सरकार 2005 से 2017 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 4400 करोड रुपये आर्थिक पैकेज के रूप में दे चुकी है।
बीआइएफआर (बोर्ड फार इंडस्ट्रियल एड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन) ने तो 2004 में ही एचईसी को बंद करने की सिफारिश की थी, लेकिन पुनरुद्धार पैकेज देकर इसे बचाया गया था। अब प्रबंधन के पास अपनी अचल संपत्तियों को बेचकर फंड जुटाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।
एचईसी प्रबंधन ने अपनी खाली जमीन के सर्वे का काम शुरू कर दिया है। जमीन की कीमत 11.50 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय की गई है।
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एचईसी की वर्तमान स्थिति
- 4300 करोड़ रुपये तक पहुंचा कुल घाटा
- 2067 करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारी थी 31 मार्च 2025 तक
- 1800 करोड़ रुपये की जमीन पर अवैध रूप से बस गई हैं 27 बस्तिया
- 4400 करोड़ रुपये का पैकेज अभी तक केंद्र सरकार अभी तक दे चुकी है पुरानी मदद के तौर पर
अतिक्रमण का खतरा
एक तरफ एचईसी प्रबंधन फड की कमी से बड़े वर्क आर्डर पूरे नहीं कर पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी की कीमती जमीन पर भू-माफिया की नजर है।
एचईसी की जमीन का हिसाब-किताब
- वर्तमान में एचईसी के पास उपलब्ध 3,500 एकड़
- 2009 में राज्य सरकार को बेची गई 2.342 एकड़
- सीआईएसएफ को दी गई 158 एकड़
- लीज पर दी गई जमीन 313 एकड़
- बेची/दी गई/लीज पर कुल जमीन 473.342 एकड़
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