- Advertisement -
cm-dipawali-bannercm-dipawali-banner

HC ने दिया था बकाया वेतन देने का आदेश; जल संसाधन विभाग ने नहीं माना, सचिव सहित अधिकारियों पर गिरी गाज

Picture of Live Dainik

Live Dainik

August 30, 2025

लोहरदगा के 15 शिक्षकों के तबादले का मामलाः झारखंड हाईकोर्ट ने उपायुक्त को उचित निर्णय लेने का दिया आदेश

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने शुक्रवार को जल संसाधन विभाग के सचिव सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों पर अवमानना ​​का मामला मानते हुए उन पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। हाई कोर्ट ने यह कार्रवाई एक पूर्व कर्मचारी को बकाया वेतन देने के संबंध में अदालती आदेश का पालन न करने पर की।

अदालत लखन प्रसाद यादव द्वारा अदालती आदेशों का पालन न करने के लिए दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें उनके बकाया वेतन के रूप में करीब 13 लाख रुपए मिलना था। हालांकि अधिकारी इस राशि का भुगतान समय पर करने में विफल रहे। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने अधिकारियों को जुर्माना राशि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय के माध्यम से झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) में जमा करने का निर्देश दिया।

पीएम मोदी की मां को गाली देने वाला निकला ओवैसी का फैन, NRC पर कर चुका है आंदोलन

See also  पहलगाम हमले पर 'शुक्रिया पाकिस्तान' कहने वाले नौशाद से पटना धमाके पर भी पूछताछ, देवबंद में तालीम

अदालत ने जिन चार अधिकारियों पर यह जुर्माना लगाया, उनके नाम प्रमुख सचिव प्रशांत कुमार, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता जमील अख्तर, तेनुघाट बांध के सुप्रिटेंडिंग इंजीनियर संजीव कुमार और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रंजीत कुजूर हैं। याचिकाकर्ता लखन प्रसाद यादव ने इससे पहले उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर कर विभाग में तृतीय श्रेणी के पद पर टाइपिस्ट के रूप में 15 नवंबर, 2000 से 27 दिसंबर, 2020 तक की अवधि के वेतन का दावा किया था।

जिस पर सुनवाई करने के बाद हाई कोर्ट ने 1 दिसंबर, 2020 को अदालत ने विभाग को यादव को बकाया वेतन देने का आदेश दिया था। इसके बाद विभाग की तरफ से एकल न्यायाधीश के आदेश को हाई कोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी गई, बेंच ने 22 फरवरी, 2023 को विभाग की अपील खारिज कर दी। इसके बाद विभाग ने फिर से इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, हालांकि वहां पर भी उसे निराशा हाथ लगी। 19 मार्च, 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह याचिका खारिज कर दी।

See also  कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके आ रहे है भारत, 6 जून को दिल्ली में करेंगे प्रदर्शन

पत्नी ने देह व्यापार से मना किया तो हैवान बना पति, पत्नी के प्राइवेट पार्ट में घोंप दी चाकू

इसके बाद विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में एक वचन दिया कि यादव के बकाया की गणना करके चार सप्ताह में भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, जब यादव को भुगतान जारी नहीं किया गया, तो उन्होंने उच्च न्यायालय में अवमानना ​​याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि शीर्ष अदालत के सामने विभाग द्वारा दिए गए वचन के बावजूद, उन्हें भुगतान नहीं किया गया।

22 अगस्त को अवमानना ​​कार्यवाही के दौरान, विभाग ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि याचिकाकर्ता को 1,00,000 रुपए का भुगतान किया जा चुका है, और गणना के बाद 11,87,230 रुपए अतिरिक्त वितरित किए जा चुके हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि भुगतान दावे की तारीख से बहुत बाद में किया गया था, और एक झूठा हलफनामा पेश किया गया था, जिसमें भुगतान की तारीख पहले बताई गई थी।

See also  पादरी को दफनाने के लिए नहीं मिल रही दो गज जमीन...जानिए कहां कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा

अदालत ने कहा कि अवमाननाकर्ताओं द्वारा झूठा हलफनामा दाखिल करना अदालत के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन था। जिसके बाद हाई कोर्ट ने चार वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना ​​का दोषी ठहराते हुए उन पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी। अदालत ने कहा कि सभी अधिकारी फार्मल ड्रेस में कोर्ट में उपस्थित हुए थे। लेकिन अगली बार सभी समूचित ड्रेस में कोर्ट में उपस्थित होंगे।

ट्रंप के पास नहीं है टैरिफ लगाने का अधिकार, US की अदालत ने फटकारा; भड़क गए राष्ट्रपति

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now