आईपीएस अनुराग गुप्ता बने झारखंड के नियमित डीजीपी, सरकार की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी

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February 3, 2025

AG ने DGP को 30 अप्रैल को माना रिटायर, 1 मई से सैलरी शून्य, केंद्र ने अनुराग गुप्ता की सर्विस को खत्म माना


DGP Anurag Gupta: झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर हमेशा विवाद रहा है। लेकिन इस बार सरकार ने इसका समाधान निकाल लिया है। 1990 बैच के आईपीएस अनुराग गुप्ता को सरकार ने डीजीपी के पद पर नियमित नियुक्ति करने की मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति दो साल के लिए होगी। उनका कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक होगा।

गृह विभाग इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। अनुराग गुप्ता अब झारखंड के नियमित डीजीपी हैं। साल 2022 में सरकार ने अनुराग गुप्ता को डीजी रैंक में प्रोन्नति दी थी। प्रोन्नति मिलने के बाद वह डीजी ट्रेनिंग के पद पर पदस्थापित रहें। 26 जुलाई 2024 को सरकार ने उन्हें झारखंड का प्रभारी डीजीपी बनाया।Ips anurag gupta dgp

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विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें प्रभारी डीजीपी के पद से हटाने का आदेश जारी किया था और अजय सिंह को डीजीपी बनाया गया था। सरकार बनने के बाद हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर को अनुराग गुप्ता को दुबारा झारखंड पुलिस का प्रभारी डीजीपी बनाया।

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अनुराग गुप्ता झारखंड पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। गढ़वा, गिरिडीह, हजारीबाग जैसे जिलों में एसपी और रांची के एसएसपी के पद पर रहे। एकीकृत बिहार में भी अनुराग गुप्ता ने बेहतर कार्य किये थे। तब उन्हें वीरता के लिए राष्ट्रपति का गैलेंट्री अवार्ड मिला था।

बता दें कि यूपी, पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना की तर्ज पर झारखंड सरकार राज्य में भी डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) नियुक्ति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक झारखंड ( पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024 दिया गया है। सात जनवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया था।

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सरकार के इस फैसले से पहले डीजीपी के चयन के लिए राज्य सरकार यूपीएससी को आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल भेजती थी, जिसमें से तीन नामों को स्वीकृत कर यूपीएससी उसे फिर राज्य सरकार को भेज देती थी। उन्हीं तीन नामों में से किसी एक को राज्य सरकार डीजीपी बनाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

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राज्य सरकार ने नई नियमावली बनाने की जरुरत महसूस की। क्योंकि वर्ष 2019 से डीजीपी के पैनल को लेकर यूपीएससी और राज्य सरकार के बीच विवाद होता रहा है। यही नहीं, पहले पैनल भेजने से लेकर डीजीपी की नियुक्ति तक करीब तीन-चार महीने का समय लग जाता था। नई व्यवस्था होने से अब सरकार को यूपीएससी को अधिकारियों के नाम का पैनल नहीं भेजना होगा, बल्कि यूपीएससी के अधिकारी ही यहां आएंगे।

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