रांचीः घाटशिला से विधायक रहे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू की घाटशिला सीट पर दावेदारी ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठबंधन को संकट में डाल दिया है। प्रदीप बलमुचू तीन बार विधायक और राज्यसभा सांसद रहने के साथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे है। पिछले कई दिनों से उन्होने दिल्ली में डेरा जमाया हुआ है और घाटशिला में कांग्रेस के टिकट को लेकर जोर आजमाइश कर रहे है। अगले एक-दो दिन में वो झारखंड लौटेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूर्व मंत्री रामदास सोरेन के परिवार ने की मुलाकात, घाटशिला सीट पर उपचुनाव को लेकर हुई चर्चा
प्रदीप बलमुचू की घाटशिला सीट पर दावेदारी ने कई समीकरणों को बदल दिया है। कभी कांग्रेस की परंपरागत सीट और गढ़ माने जाने वाले घाटशिला सीट पर अब झारखंड मुक्ति मोर्चा का कब्जा है। पूर्व मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद नवंबर में घाटशिला सीट पर उपचुनाव की संभावना है। जेएमएम के उम्मीदवार के रूप में इस सीट पर रामदास सोरेन की पत्नी सूरजमनी सोरेन या उनके बेटे सोमेश सोरेन उम्मीदवार हो सकते है, वहीं बीजेपी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन चुनाव मैदान में आ सकते है।
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हेमंत सोरेन और चंपाई सोरेन की प्रतिष्ठा वाली इस सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू की दावेदारी ने कई खेल बना और बिगाड़ देने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। सबसे पहले ये समझना होगा कि प्रदीप बलमुचू घाटशिला सीट पर क्यों एक्स फैक्टर बन गए है और उस सीट पर उनकी दावेदारी में कितना दम है। प्रदीप बलमुचू तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके है। 2005 में वो अंतिम बार इस सीट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
2009 के विधानसभा चुनाव में प्रदीप बलमुचू कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में उतरे और उनके सामने जेएमएम के रामदास सोरेन और बीजेपी से सूर्य सिंह बेसरा थे। इस चुनाव में रामदास सोरेन को सबसे ज्यादा 38283 वोट मिले और वो पहली बार विधानसभा पहुंचे। प्रदीप बलमुचू को 37051 और सूर्य सिंह बेसरा को 28561 वोट मिले। 2014 के चुनाव में प्रदीप बलमुचू की जगह उनकी बेटी सिंड्रेला बलमुचू कांग्रेस उम्मीदवार बनकर चुनाव मैदान में पहली बार उतरी उनका मुकाबला वर्तमान विधायक रामदास सोरेन और बीजेपी के उम्मीदवार लक्ष्मण टुडू के साथ हुआ। लक्ष्मण टुडू 52506 वोट पाकर ये चुनाव जीत गए और रामदास सोरेन को 46103 और सिंड्रेला बलचुमू को 36672 वोट मिले। 2019 के चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के करीबी रहे लक्ष्मण टुडू का टिकट काटकर लखन मार्डी को बीजेपी उम्मीदवार बनाया। जेएमएम से रामदास सोरेन एक बार फिर से मैदान में थे और उनके सामने प्रदीप बलमुचू कांग्रेस उम्मीदवार की जगह आजसू पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान खड़े थे। इस चुनाव में जेएमएम के रामदास सोरेन 63531 वोट पाकर चुनाव जीत गए और लखन मार्डी 56807 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। प्रदीप बलमुचू को केवल 31910 वोट मिले, लेकिन उन्होने एक दमदार उपस्थिति जरूर दर्ज की।
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2024 के चुनाव आते-आते प्रदीप बलमुचू का कांग्रेस में घर वापसी हो गई लेकिन जेएमएम के साथ गठबंधन की वजह से उन्हें वो सीट छोड़नी पड़ी और चुनाव मैदान से हटना पड़ा। इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे तो जेएमएम से रामदास सोरेन जो चंपाई की जगह हेमंत कैबिनेट में शामिल हुए थे वो गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। इस बार जेएमएम की राह तब और आसान हो गई जब पूर्व विधायक और बीजेपी नेता लक्ष्मण टुडू चुनाव से ठीक पहले हेमंत सोरेन की मौजूदगी में जेएमएम में शामिल हो गए। लक्ष्मण टुडू के चुनाव नहीं लड़ने का फायदा रामदास सोरेन को हुआ और आमने-सामने की लड़ाई में रामदास सोरेन को अब तक का सबसे ज्यादा 98356 वोट मिले और वो बड़े अंतर से चुनाव जीत गए।
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चंपाई सोरेन के लिए प्रतिष्ठा की सीट रही घाटशिला में बाबूलाल सोरेन को 2024 विधानसभा चुनाव में 75910 वोट मिले और वो 22446 वोट से चुनाव हार गए। रामदास सोरेन के निधन की वजह से होने वाले उपचुनाव में एक बार फिर से चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल की उम्मीदें जग गई है। बीजेपी की ओर से बाबूलाल सोरेन अगर चुनाव मैदान में उतरते है तो प्रदीप बलमुचू के चुनाव लड़ने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, ऐसे में जेएमएम उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़ सकती है ऐसा माना जा रहा है। कहा तो ये भी जा रहा है कि अगर प्रदीप बलमुचू चुनाव नहीं लड़ते है तो जेएमएम की सहानुभूति लहर में एकतरफा जीत हो सकती है। अब सबकी नजर कांग्रेस के आलाकमान और प्रदीप बलमुचू पर जाकर टिक गई है क्योंकि माना जा रहा है कि जेएमएम की ओर से रामदास के परिवार से कोई उम्मीदवार बन सकता है। लक्ष्मण टुडू ने भी रामदास सोरेन के परिवार को अपना समर्थन दे दिया है और कहा है कि जो भी हेमंत सोरेन फैसला लेंगे वो उसका समर्थन करेंगे। ऐसे में जेएमएम उम्मीदवार की राह को मुश्किल करने और इस चुनाव को रोचक बनाने के लिए अगर प्रदीप बलमुचू चुनाव लड़ते है तो कई समीकरण बदल जाएंगे ऐसे में किसी भी उम्मीदवार के जीत का अंदर बहुत ज्यादा होगा, इसकी गुंजाइश बहुत कम है।


