खूंटी: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष ‘स्वर्णिम बिरसा’ के अवसर पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) ने रविवार को उनके जन्मस्थल उरीहातू में ‘जन-जातीय गौरव यात्रा’ का आयोजन किया। कार्यक्रम में सबसे विशेष उपस्थिति भगवान बिरसा मुंडा के वंशज सुखराम मुंडा की रही। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय नायकों के इतिहास, सांस्कृतिक धरोहर और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना था।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 100 से अधिक छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारी उरीहातू पहुंचे। अलग-अलग राज्यों से आए छात्रों की भी बड़ी भागीदारी रही, जिसने आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। यात्रा स्थल पर पारंपरिक नृत्य, जनजातीय संगीत और नुक्कड़ नाटकों ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया। भगवान बिरसा मुंडा के शहीद स्थल डोंबारी बुरु भी हुए।
कार्यक्रम का समन्वय वाणिज्य विभाग के सहयोगी प्रोफेसर डॉ. के.बी. सिंह ने किया। डॉ. सिंह ने इस यात्रा को केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी इतिहास और समकालीन समाज के बीच वैचारिक संवाद का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि, “आज़ादी के संघर्ष में बिरसा मुंडा और नर्मल मुंडा जैसे नायक न केवल प्रतिरोध के प्रतीक हैं बल्कि भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की नींव रखने वाले विचारों के अग्रदूत भी रहे।” इस दौरान राजनीति विज्ञान विभाग के शशांक कुलकर्णी तथा दो अन्य शिक्षक सदस्य भी आयोजन संचालन में सक्रिय रहे।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने बिरसा मुंडा और नर्मल मुंडा के आंदोलन पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई, जिसमें उनके जीवन, संघर्ष और समाज सुधार की योजनाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया। यात्रा में स्थानीय ग्रामीणों की भी उपस्थिति रही जिन्होंने छात्रों के साथ सांस्कृतिक संवाद में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि आने वाले महीनों में स्वर्णिम बिरसा वर्ष के तहत और भी अकादमिक, सांस्कृतिक तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में इलाके के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर धनेश महतो और सरपंच निर्मल मुंडा भी मौजूद रहे।









