फेसबुक पर आया थैंक यू मेरी जान का संदेश तलाक का आधार नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील मंजूर की

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July 18, 2026

फेसबुक पर आया थैंक यू मेरी जान का संदेश तलाक का आधार नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील मंजूर की

रांचीः झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि फेसबुक पर आया “थैंक यू मेरी जान”.. जैसा संदेश तलाक या अवैध संबंध साबित करने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए चाईबासा फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही विवाह बहाल करने का भी निर्देश दिया। होईकोर्ट ने कहा कि केवल एक सोशल मीडिया संदेश और फेसबुक मित्रता पर अवैध संबंध का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि फैमिली कोर्ट ने कथित अवैध संबंध वाले व्यक्ति को पक्षकार बनाये बिना उसके खिलाफ टिप्पणी कर गंभीर गलती की। ऐसे आरोप किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं, इसलिए बिना सुनवाई का अवसर दिये उसके खिलाफ निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
क्रूरता और अवैध संबंध के आरोप
पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय के उस आदेश को रद करने की मांग की थी, जिसमें उस पर क्रूरता और अवैध संबंध के आरोप लगाए गए थे। हाई कोर्ट ने कहा कि ये आरोप किसी ठोस सबूत पर आधारित नहीं हैं। अवैध संबंध का आरोप सामाजिक रूप से बहुत गंभीर कलंक लगाता है, इसलिए इसे संदेह या अधूरे सबूतों के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के उस निष्कर्ष को भी गलत ठहराया, जिसमें पत्नी द्वारा झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराने को क्रूरता माना गया था। पत्नी ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि वह व्यक्ति महज एक फेसबुक मित्र है, जिससे उसकी कभी मुलाकात नहीं हुई।
फेसबुक मित्र ने लिखा थैंक यू मेरी जान
सुनवाई के दौरान उसने स्वीकार किया कि उस फेसबुक मित्र ने एक बार थैंक यू मेरी जान संदेश भेजा था, लेकिन उसने इस पर आपत्ति जताई थी। हाई कोर्ट ने पाया कि पारिवारिक न्यायालय ने इस अकेले संदेश को अवैध संबंध का प्रमाण मानकर बड़ी भूल की। बेंच ने कहा कि बिना किसी मुलाकात या घनिष्ठ संबंध के सबूत के, एक सोशल मीडिया संदेश इतने गंभीर निष्कर्ष के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
पति की जेब से 10-20 रुपये निकाले
इसके अलावा, कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के इस निष्कर्ष से भी असहमति जताई कि पत्नी ने पति की जेब से पैसे निकालकर क्रूरता की। पत्नी ने दो बार 10-20 रुपये लेने की बात स्वीकारी, लेकिन कहा कि घर में साग-मुरी जैसी रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। हाई कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक जीवन में ऐसी बातें आम हैं, इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता। बल्कि, पत्नी का यह स्पष्टीकरण पति की घरेलू जरूरतों के लिए पैसे मुहैया कराने में विफलता को दर्शाता है।
पत्नी को घर के अंदर जाने से रोका
खंडपीठ ने यह भी कहा कि पारिवारिक न्यायालय ने कथित अवैध संबंध के आरोपित व्यक्ति को पक्षकार बनाए बिना निष्कर्ष निकालकर गलती की। इस तरह के आरोप किसी की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं, और बिना उस व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए उस पर फैसला नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि जब पत्नी अपने पति के घर लौटी, तो किराए का घर पर तालाबंद मिला और उसे अंदर जाने से रोका गया।हाई कोर्ट ने निष्कर्ष दिया कि पति क्रूरता साबित करने में विफल रहा, और उसके द्वारा पत्नी के चरित्र पर लगाए गए निराधार आरोप क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। इस आधार पर कोर्ट ने तलाक का आदेश रद कर दिया और विवाह बहाल कर दिया।

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