रांचीः झारखंड में विधानसभा चुनाव में अभी तीन साल से ज्यादा का समय है लेकिन यहां अगले चुनाव को लेकर सियासी हलचल अभी से शुरू हो गई है। एक तरफ आजसू-बीजेपी गठबंधन को लेेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है, खासतौर पर ईचागढ़ से आजसू उम्मीदवार रहे हरेलाल महतो के पार्टी से इस्तीफा देने और आजसू प्रवक्ता संजय मेहता का इसको लेकर बड़ी साजिश के बयान के बाद अगले चुनाव से पहले आजसू-बीजेपी गठबंधन पर संकट के बादल नजर आ रहे। यही नहीं आजसू के बीजेपी में विलय को लेकर भी चर्चाएं गर्म है। बीजेपी अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले खुद को झारखंड में मजबूत करना चाहती है और उसको लेकर सियासी बिसात अभी से ही बिछाना शुरू कर दिया है। एक तरफ आदिवासी वोटरों को रिझाने के लिए उसी समाज के नेता और बीजेपी ने झारखंड का प्रभारी बनाया है तो दूसरी ओर झारखंड से सटे पुरूलिया में कुड़मी महासम्मेलन करके कुड़मी वोटरों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की जोर-आजमाइश शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर इसी सिमडेगा में पूर्व मंत्री एनोस एक्का के जन्मदिन पर बीजेपी नेताओं के साथ उनकी तस्वीर ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है। दरअसल, भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता पूर्व एनोस एक्का के जन्मदिन पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा उनके घर पहुंचे। मधु कोड़ा के साथ बीजेपी के जिलाध्यक्ष दीपक पुरी और महामंत्री मुकेश श्रीवास्तव की मौजूदगी ने कई अटकलों को जन्म दे दिया। पूर्व मंत्री विमला प्रधान के निधन के बाद सिमडेगा में बीजेपी अलग सियासी समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है। एनोस एक्का के घर पर बीजेपी के कई नेताओं की मौजूदगी ने अटकलों को जन्म दे दिया।


सोशल मीडिया में और राजनीतिक हलकों में ये चर्चा हो रही है कि क्या एनोस एक्का बीजेपी के साथ जा रहे है। क्या एनोस एक्का की पार्टी बीजेपी में विलय करने जा रही है या फिर अगले चुनाव से पहले कोई गठबंधन तैयार किया जा रहा है। एनोस एक्का सिमडेगा जिले के प्रभावशाली नेताओं में रहे है और मधु कोड़ा की सरकार में मंत्री रह चुके है। मधु कोड़ा की सरकार में मंत्री रहे भानु प्रताप शाही और कमलेश सिंह आज की तारीख में बीजेपी के सदस्य है, यही नहीं मधु कोड़ा भी बीजेपी में शामिल हो चुके है। ऐसे में एनोस एक्का को लेकर लगाए जा रहे कयासों में राजनीतिक विश्लेषकों को दम नजर आता है।
हालांकि लाइव दैनिक ने एनोस एक्का से फोन पर इस मुलाकात के सियासी मायने जानने की कोशिश की। पूर्व मंत्री एनोस एक्का ने इसे महज एक व्यक्तिगत मुलाकात बताया, उनका कहना है कि उनकी पार्टी बीजेपी से पुरानी पार्टी है, इसलिए उसमें विलय की कोई संभावना नहीं है। हालांकि उन्होंने गठबंधन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले और कहा कि जब चुनाव का समय आएगा तो देखा जाएगा। एनोस एक्का सजायाफ्ता है वो चुनाव नहीं लड़ सकते। एनोस को अपनी बेटी ईरीन एक्का के राजनीति जीवन की चिंता है। सिमडेगा सीट से पहले एनोस और फिर उनकी बेटी चुनाव लड़ती रही है। एनोस एक्का की बेटी 2024 को चुनाव झारखंड पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लड़ चुकी है जिसे 16 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। सिमडेगा में एनोस एक्का का धर्मांतरित आदिवासियों के बीच मजबूत पकड़ रही है, जिले में इस बात के सियासी कयास लगाए जा रहे है कि बीजेपी एनोस एक्का के रास्ते विमला प्रधान के बाद यहां नया सियासी समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है जो उसे पहले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में फायदा पहुंचाये। सिमडेगा लोकसभा क्षेत्र खूंटी के अंतर्गत आता है जहां पिछले चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की हार हुई थी। 2029 के चुनाव को लेकर बीजेपी यहां नया सियासी प्रयोग कर सकती है। एनोस एक्का और बीजेपी के बीच मधु कोड़ा के अहम कड़ी माने जा रहे है। एनोस एक्का के बीजेपी के साथ जाने के बाद नए राजनीतिक समीकरण बन सकते है। दागी नेताओं से बीजेपी की दूरी अब कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा है। पहले भानु प्रताप शाही, फिर मधु कोड़ा और कमलेश सिंह के बीजेपी में जाने के बाद अब एनोस एक्का और बीजेपी की नजदीकियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।





