डेस्कः सीबीआई ने कथित आर्थिक अपराधी मोनिका कपूर को अमेरिका से हिरासत में ले लिया है। 26 साल से फरार चल रही मोनिका को सीबीआई की टीम बुधवार रात भारत लाएगी। इसे भारतीयों एजेंसियों की एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
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केंद्रीय एजेंसी अमेरिका से मोनिका कपूर को हिरासत में लेकर एक अमेरिकी एयरलाइंस की फ्लाइट से भारत रवाना हो चुकी है। सीबीआई की इस टीम के बुधवार रात तक भारत पहुंचने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट (ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट) ने भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी।
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अमेरिकी विदेश मंत्री ने कपूर के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें भारत वापस लाया गया तो उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है, इसलिए उनका प्रत्यर्पण 1998 के विदेश मामलों के सुधार और पुनर्गठन अधिनियम द्वारा लागू किए गए संयुक्त राष्ट्र यातना विरोधी कन्वेंशन का उल्लंघन होगा।
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मोनिका कपूर 1999 में कथित धोखाधड़ी के बाद अमेरिका चली गई थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने दो भाइयों के साथ मिलकर ज्वेलरी व्यवसाय के लिए फर्जी दस्तावेज बनाए, जिनका इस्तेमाल भारतीय सरकार से कच्चे माल के शुल्क-मुक्त आयात के लाइसेंस लेने में किया गया।
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क्या है वो फ्रॉड कांड
यह मामला साल 1999 का है। आरोप है कि मोनिका कपूर और उसके दो भाई राजन और राजीव खन्ना ने मिलकर फर्जी एक्सपोर्ट डॉक्यूमेंट तैयार किए। इन नकली कागजों की मदद से इन्होंने भारत सरकार से 16 ‘रिप्लेनिशमेंट लाइसेंस’ हासिल किए। इनमें से 14 लाइसेंस इन्होंने एक दूसरी कंपनी को बेच दिए, जिसने इनका इस्तेमाल कर के बिना किसी कस्टम ड्यूटी के सोना आयात किया। इस हेराफेरी की वजह से भारत सरकार को करीब 6.8 लाख डॉलर यानी लगभग 5.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।




