CWC 2025: भारत-साउथ अफ्रीका का फाइनल, जेमिमा दे पाएंगीं ट्रोलर्स को जवाब ? जानिए कैसे बदल गई महिला क्रिकेट टीम की किस्मत ?

मुंबई: CWC 2025 यानी महिला क्रिकेट विश्व कप का फाइनल भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेना जाने वला है ।टीम इंडिया के पास पहली बार विश्व चैंपियन बनने का मौका है और दवाब है तो दूसरी ओर सेमीफाइनल में ऐतिहासिक पारी खेलने वाली जेमिमा रोड्रिग्स पर ट्रोलर्स को जवाब देने का एक और मौका । दरअसल सेफीमाइनल में शतक लगाने के बाद जेमिमा के ईसाई होने पर जिस तरह ट्रोल किया जा रहा है उससे उन पर सबसे ज्यादा प्रेशर है । 

जेमिमा रोड्रिग्स पर दवाब ?

1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व चैंपियन बनी टीम इंडिया ने भारत में क्रिकेट का रूप बदल दिया उसके बाद महिला क्रिकेट से भी ऐसी ही उम्मीदें की जा रही है। कभी महिलाओं के क्रिकेट मैच के दौरान खाली रहने वाले स्टेडियम अब खचाखच भरे रहने लगे हैं इससे क्रेज समझा जा सकता है ।

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फाइनल के लिए भीड़

ऐसा पहली बार था जब बहुत से लोगों ने महिलाओं के क्रिकेट की तीव्रता, कौशल और रोमांच को इतने करीब से महसूस किया था। अब वही जिज्ञासा रविवार के मुकाबले के लिए उत्सुकता में बदल गई है। फाइनल अब एक राष्ट्रीय आयोजन बन चुका है। मैच की पूर्व संध्या पर, डी.वाई. पाटिल स्टेडियम के टिकट काउंटर पर उमड़ी भीड़ के बीच, हरमनप्रीत ने अपनी टीम के सामने आने वाली चुनौती के महत्व को स्वीकार किया।

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अब महिला टीम का भी क्रेज

हरमनप्रीत ने कहा “जब हम 2017 के वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने के बाद भारत लौटी  तो बहुत बदलाव देखने को मिले। महिलाओं का क्रिकेट आगे बढ़ा, हमने बहुत सी नई लड़कियों को खेलते देखा। इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि अगर हम यह टूर्नामेंट जीतते हैं, तो और भी बड़े बदलाव होंगे — न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि घरेलू स्तर पर भी सुधार देखने को मिलेंगे। हम उस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं जब महिला क्रिकेट को और गंभीरता से लिया जाएगा और उसे अधिक दर्शक मिलेंगे।”

कभी खाली स्टेडियम में खेलती थी टीम

ये बात किसी से छिपी नहीं कि  भारत की महिला क्रिकेटर हाशिए पर रहीं । लगभग खाली मैदानों में खेलतीं और साधारण होटलों में ठहरतीं। 2006 में जब महिला क्रिकेट बीसीसीआई के अधीन आया, तब भी खिलाड़ियों को केंद्रीय अनुबंध (सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट) 2015 में जाकर मिला। घरेलू टूर्नामेंट मानक के अनुरूप नहीं थे और अधिकांश खिलाड़ी रेलवे जैसी संस्थाओं में नौकरियां कर अपनी क्रिकेट की चाहत को बनाए रखती थीं। अंतरराष्ट्रीय दौरे भी छिटपुट और अक्सर कम समय के नोटिस पर आयोजित किए जाते थे।

2017 के बाद बदल गया खेल

2017 के इंग्लैंड में खेले गए महिला वर्ल्ड कप ने यह सब बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में हरमनप्रीत का 171 रन का तूफानी प्रदर्शन इतिहास बन गया। पहली बार किसी महिला मैच ने पूरे भारत में ट्रेंड किया और लॉर्ड्स के फाइनल को करोड़ों भारतीयों ने देखा। भले ही भारत इंग्लैंड के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार गया, लेकिन उनके प्रदर्शन का असर गहरा था।

उसके बाद खेल में निवेश बढ़ा। केंद्रीय अनुबंधों में सुधार हुआ, कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ को प्रोफेशनल बनाया गया, और यात्रा तथा प्रशिक्षण सुविधाओं को पुरुष टीमों के स्तर पर लाया गया। 2023 में महिला प्रीमियर लीग (WPL) की शुरुआत हुई।

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