अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर आ गए हैं। उन्होंने सोरोस और उनके बेटे को संघीय धोखाधड़ी के आरोपों में घेरने के संकेत दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि सोरोस ने देश में हिंसक प्रदर्शनों का समर्थन किया है। खास बात है कि भारत में भी सत्तारूढ़ गठबंधन की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी भी सोरोस पर गंभीर आरोप लगाती रही है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘जॉर्ज सोरोस और उनके प्यारे वामपंथी बेटे पर RICO लगना चाहिए, क्योंकि वे पूरे अमेरिका में हिंसक प्रदर्शनों और कई बातों को समर्थन देते हैं।’ उन्होंने लिखा, ‘हम इन पागलों को अमेरिका को और बर्बाद करने का मौका नहीं देंगे। कभी सांस लेने या आजाद होने का मौका नहीं देंगे।’ उन्होंने सोरोस पर नजर रखने की बात कही है।
ट्रंप ने आगे लिखा, ‘सोरोस और उसके पागलों के समूह ने हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इसमें उनके पागल वेस्ट कोस्ट दोस्त शामिल हैं। ध्यान रहे कि हम आपको देख रहे हैं।’
हंगरी के बुडापेस्ट में साल 1930 में पैदा हुए सोरोस अमेरिकी निवेशक हैं। उन्होंने इतिहास में सबसे सफल निवेशकों में से एक माना जाता है। वह ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स के संस्थापक भी हैं। हंगरी में पैदा होने के बाद वह 1947 में इंग्लैंड पहुंचे और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की।
इसके बाद सोरोस ने फाइनेंस सेक्टर की ओर रुख किया। वह लंदन की कई कंपनियों में ट्रेडर और एनालिस्ट रहे और इंडस्ट्री का अनुभव हासिल किया। खबरें हैं कि 1956 में सोरोस अमेरिका पहुंचे थे। शुरुआती वर्षों में वह पोर्टफोलियो मैनेजर समेत कई पदों पर अलग-अलग कंपनियों में काम करते रहे।
इस दौरान सोरोस फंड की स्थापना की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोरोस फंड मैनेजमेंट 28 बिलियन डॉलर की संपत्ति संभालता है। वहीं, खुद सोरोस 7.2 बिलियन डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। वह कई परोपकारी कार्यों के लिए 32 बिलियन डॉलर दान कर चुके हैं।
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भारत में भी सोरोस भाजपा के निशाने पर रहते हैं। जुलाई में ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने के साजिशकर्ताओं में एक अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस भी हैं। भारत से उसकी चिढ़ जगजाहिर है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि भारत में उसके मुख्य उपकरण विपक्ष के नेता राहुल गांधी हैं।
राहुल ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे। इस पर जून में भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के आरोपों की आलोचना करते हुए कहा कि वह जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया के बारे में मतदाताओं के मन में संदेह और असंतोष के बीज बोने का बार-बार प्रयास कर रहे हैं।
भाजपा नेता ने रेखांकित किया कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है, चाहे वह तेलंगाना हो या कर्नाटक तब उसी प्रणाली की ‘निष्पक्ष और न्यायपूर्ण’ कहकर प्रशंसा की जाती है।
मालवीय ने कहा, ‘लेकिन जब वे हार जाते हैं – हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र तक – तो रोना-धोना और षड्यंत्र का विमर्श शुरू हो जाता हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह सीधे जॉर्ज सोरोस की रणनीति है – लोगों के अपने ही संस्थानों पर विश्वास को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करना, ताकि उन्हें भीतर से तोड़कर राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।’
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