वैष्णो देवी यात्रा में 34 की मौत; भारी बारिश का था रेड अलर्ट फिर भी जारी थी यात्रा, उमर अब्दुला ने उपराज्यपाल पर उठाए सवाल

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जम्मू: वैष्णों देवी की यात्रा पर गए 34 श्रद्धाुलओं की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं । भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखने पर सवाल उठ रहे हैं । मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने पूछा है कि आखिरी अलर्ट के बाद यात्रा क्यों नहीं रोकी गई । गौरतबल है कि  जम्मू कश्मीर में बीते 24 घंटे के भीतर हुई रिकॉर्ड बारिश ने भारी तबाही मचाई है। जम्मू संभाग के रेASI और डोडा जिलों में मंगलवार से बुधवार के बीच कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकतर श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आए थे।

अर्धकुंवारी में सबसे बड़ा हादसा

मंगलवार दोपहर अर्धकुंवारी के पास अचानक बादल फटने से 34 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। वहीं, डोडा जिले में सुबह बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण चार लोगों की जान चली गई। मृतकों में पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई यात्री शामिल हैं।सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जम्मू के शवगृह में अब तक 34 शव लाए गए हैं, जिनमें 18 की पहचान हो चुकी है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री का दौरा

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कटरा अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने घटना को “दिल दहला देने वाली प्राकृतिक त्रासदी” बताया और मृतकों के परिजनों को 9-9 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हादसे पर गहरा शोक जताते हुए सवाल उठाए कि मौसम चेतावनी पहले से होने के बावजूद श्रद्धालुओं को क्यों नहीं रोका गया। उन्होंने कहा, “जब हमें जानकारी थी, तब हमें कुछ कदम उठाने चाहिए थे। आखिर ये लोग ट्रैक पर क्यों थे? उन्हें सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं ले जाया गया?”

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यात्रा स्थगित, भूस्खलन में चार दबे

लगातार बारिश और भूस्खलन के बाद मंगलवार दोपहर 1:30 बजे के बाद यात्रा को पूरी तरह रोक दिया गया। इससे पहले हिमकोटी मार्ग पर सुबह से ही यात्रा बंद थी। बताया गया कि बारिश से बचने के लिए लोहे की शेड के नीचे रुके चार यात्री भूस्खलन की चपेट में आकर मारे गए।

1910 के बाद सबसे अधिक बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू में मंगलवार को 24 घंटे में 380 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यह 1910 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे अधिक बारिश है। इससे पहले सितंबर 1988 में 270.4 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जम्मू-पठानकोट, जम्मू-श्रीनगर और बटोटे-डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिए गए। जम्मू शहर के कई इलाके पानी में डूब गए, जहां एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और सेना ने नावों से लोगों को सुरक्षित निकाला। अब तक 5,000 से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकाला गया है।

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भारतीय सेना के हेलीकॉप्टरों ने मंगलवार को साहसिक अभियान चलाते हुए माधोपुर हेडवर्क्स के पास फंसे 22 सीआरपीएफ जवानों और तीन आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।

कश्मीर में अलर्ट

वहीं, श्रीनगर में झेलम नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। 2014 की भयंकर बाढ़ की यादों के कारण घाटी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सभी स्कूल और कॉलेज गुरुवार को बंद रखने का आदेश दिया गया है। बारिश और भूस्खलन से ऑप्टिकल फाइबर केबल क्षतिग्रस्त होने के चलते घाटी में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी प्रभावित हो गई हैं। प्रशासन ने कहा है कि निगरानी टीम लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

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