कोयला घोटाला: ईडी ने अनूप माजी की 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की, हवाला नेटवर्क का खुलासा

Anoop-Majhi

रांची: ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) में अवैध खनन से कोयला घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने कोयला मफिया अनूप माजी उर्फ लाला व उसके सहयोगियों से जुड़े 100.44 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थाई रूप से जब्त की है। ईडी ने एक्स पोस्ट के माध्यम से अधीकृत बयान जारी कर इसकी जानकारी साझा की है। ईडी ने बताया गया है कि कोयला घोटाला के इस केस में अब तक ईडी आरोपितों से जुड़े 322.71 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है।

इससे पहले ईडी ने आठ जनवरी को आरोपितों से जुड़े कोलकाता व दिल्ली में दस परिसरों में छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान जब्त किए गए सबूत अपराध की आय से अर्जित संपत्ति की जानकारी देने में सहायक साबित हुए। ईसीएल के लीजहोल्ड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी तरीके से कोयला खनन व चोरी से जुड़े मामले की जांच कर रही है। ये गतिविधियां अनूप माजी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने की थी।

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ईडी ने जांच में पाया कि इस सिंडिकेट ने अवैध खनन कर बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी की। उक्त कोयले को स्थानीय प्रशासन की मदद से पश्चिम बंगाल की अलग-अलग फैक्ट्रियों में खपाया।अनूप माजी उर्फ लाला ने अवैध परिवहन चालान व पैड प्रस्तुत किया था, जिसे आमतौर पर लाला पैड के नाम से जाना जाता है। यह अवैध परिवहन चालान उन फर्मो के नाम पर जारी टैक्स इनवाइस की तरह काम करता था जो है ही नहीं।

अस्थाई रूप से जब्त की गई संपत्ति में बेनिफिशियरी कंपनियों जैसे शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड व गगन फेरोटेक लिमिटेड के नाम पर अचल संपत्ति, फिक्सड डिपोजिट व म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। ईडी ने जांच में पाया कि नकली परिवहन चालान के साथ ट्रांसपोर्टर को दस या बीस रुपये का करेंसी नोट दिया जाता था। ट्रांसपोर्टर उस करेंसी नोट की फोटो खींचता था, जिसे वह अवैध कोयला ले जा रहे ट्रक, डंपर या टिपर की नंबर प्लेट के पास रखता था।

वह फोओ कोयला सिंडिकेट और आपरेटर को भेजता था। फिर आपरेटर उस फोटो को वाट्सएप के माध्यम से गाड़ी के रास्ते में मौजूद संबंधित पुलिस अधिकारियों व दूसरे सरकारी अधिकारियों को भेज देता था। यह संकेत था कि उक्त ट्रक को रोका न जाय। अगर रोका भी जाय तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाय।

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ईडी ने अनूप माजी उर्फ लाला के सिंडिकेट के जब्त दस्तावेज की जांच से पता लगाया कि उस सिंडिकेट ने अपराध से लगभग 2742 करोड़ रुपये की कमाई की। पीएमएलए के तहत जांच के दौरान जब्त किए गए रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, टैली डेटा व वॉट्सऐप कम्यूनिकेशन सहित विश्लेषित किए गए सबूतों से सिस्टमैटिक नकदी लेन-देन व अपराध से होने वाली कमाई को स्थानांतरित करने तथा लेयरिंग के लिए हवाला चैनलों के इस्तेमाल का पता चला है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट अपराध से होने वाली कमाई को नकदी में स्थानांतरित करने के लिए एक अंडरग्राउंड हवाला नेटवर्क चलाता था। इसमें फार्मल बैंकिंग चैनल व रेगुलेटरी निगरानी को बाइपास किया जाता था। एक आम लेन-देन में पाने वाला, भेजने वाले के साथ एक यूनिक कोड शेयर करता था, जो आमतौर पर दस रुपये या किसी दूसरे करेंसी नोट का सीरियल नंबर होता था। यह सीरियल नंबर ट्रांजेक्शन की विश्वसनीयता के तौर पर काम करता था।

ईडी जांच में पाया है कि घोटाले का पूरा खेल हवाला के जरिये संचालित हो रहा था। भेजने वाला यह कोड एक हवाला आपरेटर को भेजा था, जो इसे पाने वाले की जगह पर एक साथी को बताता था। तय राशि की डिलिवरी होने पर पाने वाला पहचान के सबूतों के तौर पर पहले से शेयर किए गए सीरियल नंबर वाला खास करेंसी नोट दिखाता था।

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सत्यापित होने के बाद नकदी का भुगतान होता था। बिना किसी औपचारिक दस्तावेज या बैंकिंग रिकॉर्ड के लेन-देन पूरा हो जाता था। इस सिस्टम ने रेगुलेटेड फाइनेंशियल सिस्टम के बाहर काम करने वाले बिचौलियों के नेटवर्क के जरिये जगहों पर बड़ी रकम की आवाजाही को मुमकिन बनाया।

ईडी ने जांच में पाया कि स्टील व आयरन सेक्टर की कुछ कंपनियों ने अवैध खनन वाले कोयले को अवैध तरीके से नकदी में खरीदा। यह जानबूझकर अपराध से हुई कमाई में मदद की, इसका इस्तेमाल किया और इसे बेदाग दिखाया। इस जुर्म में कई लेयर व मुश्किल वित्तीय लेन-देन शामिल हैं।

इन्हें जुर्म की कमाई को छिपाने के लिए डिजाइन किया गया था। ईडी सिस्टमैटिक तरीके से हर लेयर को खोल रही है, ताकि असली बेनिफिशियरी का पता लगाया जा सके व अपराधी की और कमाई की पहचान की जा सके। अवैध तरीके से अर्जित फंड की लॉन्ड्रिंग में शामिल दूसरे लोगों का भी पता लगाया जा सके, ताकि इस मुश्किल आर्थिक जुर्म के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके।

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