झारखंड के पूर्वी सिंहभूम ज़िले से हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है।
जहां आदिवासी गांव के लोग भूख से बेहाल हैं, वहीं परिजन अपने बच्चों को खाना खिलाने के बजाय नशा देकर चुप करा रहे हैं। यह दृश्य दिल को झकझोर कर रख देता है — कैसे माता-पिता भूख से तड़पते बच्चों को नशा खिलाकर उनका पेट भरने को मजबूर हैं।
इस मामले को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर करते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कई सवाल खड़े किए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर वीडियो के साथ एक लंबा पोस्ट भी साझा किया है। उन्होंने लिखा:
“जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में उन्हें नशे की लत में धकेला जा रहा है। खुद को आदिवासी हितैषी बताने वाली सरकार को शर्म से सिर झुका लेना चाहिए।”
उन्होंने आगे लिखा:
“जिन आदिवासियों की आवाज़ पर यह सरकार सत्ता में आई, उन्हीं को जीवन और शिक्षा से वंचित छोड़ दिया गया है। सबर और बिरहोर जैसी जनजातियां हमारी पहचान और अस्मिता का हिस्सा हैं। लेकिन भूख और नशे ने उन्हें लुप्त होने की कगार पर ला खड़ा किया है।”
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि:
“झारखंड आज उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां सत्ता में बैठे लोगों को आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। और जो कोई इनके हक़ में आवाज़ उठाता है, उसे एनकाउंटर में ख़ामोश कर दिया जाता है।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि:
आदिवासी समाज को इस नशे की कुरीति से बचाने के लिए ज़िला प्रशासन जागरूकता फैलाए।
जिन जनजातियों के नाम पर वोट लिया गया, उनकी असली हालत सुधारी जाए।
हमारी आदिवासी सभ्यता और संस्कृति को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।





