चंपाई सोरेन कैबिनेट में शामिल 8 नये मंत्रियों के बारे में जानिये क्यों मिली उन्हे जगह और क्यों कटा बैद्यनाथ राम का पत्ता

रांची : शुक्रवार को चंपाई सोरेन के नेतृत्व में चल रही सरकार के कैबिनेट का पहला विस्तार हुआ। इस विस्तार के साथ ही चंपाई सोरेन ने पहली बाधा पार कर ली है , क्योकि आठ फरवरी को होने वाला कैबिनेट विस्तार उलझनों की वजह से ही टाला गया था। हालांकि इस कैबिनेट विस्तार में भी कुछ बाधाएं आई है। बैद्यनाथ राम अंतिम समय में शपथ लेने वाले सूची से गायब हो गए। कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस के कुछ विधायकों की नाराजगी की खबरों के बीच ही नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। मंत्रिमंडल विस्तार में जेएमएम के सभी पुराने मंत्रियों को मौका मिला, वहीं हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रिमंडल विस्तार में जेएमएम विधायक सीता सोरेन मौका नहीं मिल पाया। इसके अलावा जेएमएम के वरिष्ठ विधायक नलिन सोरेन, स्टीफन मरांडी और लोबिन हेम्ब्रम को भी मौका नहीं मिल पाया। ऐसे में सीएम चंपाई सोरेन को कांग्रेस के अलावा जेएमएम के अंदर से भी बड़ी चुनौती मिल सकती हैं।

आईपीएस के रूप में रामेश्वर उरांव ने आडवाणी को किया था गिरफ्तार
चंपाई सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से डॉ. रामेश्वर उरांव दोबारा मंत्री बने हैं। रामेश्वर उरांव आईपीएस ऑफिसर भी रहे हैं। 2004 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में आए रामेश्वर उरांव लोहरदगा संसदीय सीट से सांसद भी रह चुके हैं। 2014 में वे विधानसभा चुनाव में विजयी रहे। आईपीएस अधिकारी के रूप में रामेश्वर उरांव ने बीजेपी के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया था और उनके रथ यात्रा को रोका था। हेमंत कैबिनेट में भी रामेश्वर उरांव सबसे धनी मंत्री थें। रामेश्वर उरांव की कुल संपत्ति 28 करोड़ रुपये से अधिक हैं।

छात्र आंदोलन के दौरान 11 बार जेल गए दीपक बिरुवा
चाईबासा सीट से लगातार तीसरी बार जेएमएम उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित दीपक बिरुवा ने छात्र आंदोलन से एक्टिव पॉलिटिक्स में आए। आजसू पार्टी से करियर स्टार्ट करने वाले दीपक बिरुवा ने वर्ष 2009, 2014 और 2019 में चाईबासा सीट से जीत हासिल की। दीपक बिरुवा के पिता महेंद्र बिरुवा एक शिक्षक थे। इसलिए उनकी पढ़ाई भी गांव में अच्छी तरीके से हुई। उन्होंने इतिहास विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। छात्र आंदोलन के दौरान दीपक बिरुवा ने 11 बार जेल यात्रा की। दीपक बिरुवा को अब भी फुटबॉल खेलना पसंद हैं। बबीता बिरुवा से उनकी शादी हुई। बन्ना गुप्ता 2009, 2014 और 2019 में लगातार तीसरी पर जमशेदपुर पूर्वी सीट से जीत हासिल की। 10वीं पास बन्ना गुप्ता 2014 में भी कृषि मंत्री रह चुके हैं और हेमंत सोरेन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे।

चाय-सिंघारा बेचने वाले का बेटा बन्ना गुप्ता फिर बने मंत्री
जमशेदपुर पश्चिमी के कांग्रेस विधायक बन्ना गुप्ता दोबारा मंत्री बने हैं। बन्ना गुप्ता के पिता रामगोपाल गुप्ता ने कदमा बाजार में चाय-नमकीन की दुकान से शुरुआत कर मथुरा मिष्ठान भंडार के रूप में मिठाई दुकान की अलग पहचान दिलाई। वे इस दुकान से करीब 50 वर्षों से ज्यादा समय तक जुड़े रहे। रामगोपाल गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नौगांवा के निवासी थे और उनका पूरा परिवार सोनारी मरारपाड़ा के दो कमरे के छोटे से घर में वे रहते थे। बन्ना गुप्ता ने को-ऑपरेटिव कॉलेज से पढ़ाई-लिखाई की। बाद में उनका परिवार कदमा में शिफ्ट हो गया।

शिबू सोरेन परिवार से निकटता मिथिलेश ठाकुर की बड़ी ताकत
16 फरवरी 1966 में जन्मे मिथिलेश कुमार ठाकुर को जन्मदिन पर बड़ा तोहफा मिला है। चंपाई सोरेन सरकार में गढ़वा के जेएमएम विधयक मिथिलेश ठाकुर को फिर से बड़ी जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले हेमंत सोरेन सरकार में भी मिथिलेश ठाकुर पेयजल स्वच्छता मंत्री थे। गढ़वा में वर्ष 2009 और 2014 में जेएमएम उम्मीदवार के रूप में पराजित होने के बावजूद मिथिलेश ठाकुर ने क्षेत्र के लोगों का साथ नहीं छोड़ा। दो चुनाव में हार मिलने के बाद मिथिलेश ठाकुर को एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी से भी ऑफर मिला, लेकिन मिथिलेश ठाकुर जेएमएम का साथ नहीं छोड़ा। जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन से निकटकता के कारण मिथिलेश ठाकुर को फिर से गठबंधन सरकार में जिम्मेदारी मिली। मिथिलेश ठाकुर के पिता कौशल कुमार ठाकुर रेंज ऑफिसर थे, जबकि मां बिमला ठाकुर गृहिणी हैं। मिथिलेश ठाकुर की दो पुत्री हैं और उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की है। मिथिलेश ठाकुर के राजनीतिक आदर्श शिबू सोरेन हैं। वे राजनीति के अलावा समय मिलने पर फुटबॉल और बैंडमिंटन जरूर खेलते हैं।

 

बसंत सोरेन अब परिवार के लिए संकट मोचक की भूमिका में
साल 2020 के उपचुनाव में दुमका विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतने वाले बसंत सोरेन अब शिबू सोरेन परिवार के लिए संकट मोचक की भूमिका में हैं। अपने बड़े भाई हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद बसंत सोरेन ने चंपाई सरकार गठन में बड़ी भूमिका निभाई। अब सरकार चलाने में भी बसंत सोरेन की बड़ी भूमिका होगी। 1 सितंबर 1977 को नेमरा गांव में जन्मे बसंत सोरेन को जेएमएम ने 2016 के राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया। लेकिन क्रॉस वोटिंग के कारण उनकी हार हुई। इसके बाद पहली 2020 के दुमका उपचुनाव में जीत के साथ उनके संसदीय राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।

कांग्रेस विधायक बादल ने समाज के लिए घर-परिवार छोड़ा
कांग्रेस विधायक बादल ने समाज में काम करने के लिए अपने घर-परिवार तक को छोड़ दिया। जरमुंडी विधानसभा सीट से 2014 और 2019 में निर्वाचित बादल अपने घर में रहने की जगह गांव-पंचायतों के स्कूल, पंचायत भवन और अन्य सरकारी भवन या किसी ग्रामीण के घर ही रात बिताते हैं। 27 सितंबर 1977 में जन्मे बादल ने समाज सेवा के लिए अब तक शादी भी नहीं की। हरी शंकर पत्रलेख और आशा देवी के पुत्र बादल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की। उनके राजनीतिक आदर्श मुंशी प्रेमचंद है, जबकि राजनीति के क्षेत्र में आदर्श राजीव गांधी है। शाकाहारी भोजन करने वाले बादल को गांव पहुंचने पर जो लोग जो कुछ देते हैं, वही खाकर उनका जीवन व्यतीत होता हैं, जबकि कई मौके पर उन्हें भूखे भी रहना पड़ता है।

हफीजुल अंसारी को अपने पिता के संघर्षों का मिला इनाम
मधुपुर के जेएमएम विधायक हफीजुल हसन अंसारी को अपने पिता हाजी हुसैन अंसारी के संघर्षा का इनाम मिला। पूर्व मंत्री हाजी हुसैन अंसारी भी पूर्ववर्ती हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री थे, लेकिन कोरोना काल में उनके निधन के बाद हफीजुल अंसारी ने उपचुनाव में मधुपुर से जीत हासिल की। इससे पहले ही हेमंत सोरेन सरकार में हफीजुल हसन अंसारी को मंत्री बना दिया गया था। 6 जनवरी 1974 में जन्मे हफीजुल हसन अंसारी ने आईएससी और माइनिंग सर्वे में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की। पिता के निधन के बाद हफीजुल हसन ने राजनीतिक विरासत को संभालने का काम किया। जबकि उनके पिता हाजी हुसैन अंसारी ने लंबे समय तक शिबू सोरेन के साथ संघर्ष किया था। हफीजुल हसन अंसारी पूर्ववर्ती हेमंत सोरेन सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण और खेलकूद, पर्यटन, कला-संस्कृति मंत्री थे।

पति के निधन के बाद राजनीति में आईं बेबी देवी दोबारा मंत्री बनीं
डुमरी विधानसभा उपचुनाव में पिछले साल पहली बार विजयी रहीं बेबी देवी अब एक साल में दूसरी बार मंत्री के रूप में शपथ लेंगी। बेबी देवी के पति और पूर्व शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का पिछले साल लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके निधन के बाद बेबी देवी सक्रिय राजनीति में आईं और अपने पति को विरासत संभाल रही हैं। बेबी देवी के पुत्र की उम्र उस समय 25 साल नहीं हुई थी, इस कारण जगरनाथ महतो के निधन के बाद जेएमएम नेतृत्व की ओर से बेबी देवी को मौका दिया गया। बेबी देवी को उपचुनाव की घोषणा के पहले ही मंत्री बनाया गया था, जिसके बाद वो डुमरी उपचुनाव में विजयी होकर विधानसभा पहुंचीं।

अंतिम समय में जेएमएम के बैजनाथ राम का कटा नाम
चंपाई सोरेन कैबिनेट विस्तार में जेएमएम विधायक बैजनाथ राम के भी शपथ लेने की चर्चा थी। बताया गया है कि उन्हें मंत्री के रूप में शपथ लेने की सूचना भी भेज दी गई थी। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के 12 विधायकों ने एक साथ बैठक कर सनसनी फैला दी, वहीं जेएमएम के अंदर नाराजगी की खबर से भी एक बर्थ को खाली रखने का फैसला लिया गया।

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