चंपाई सोरेन और उनके बेटे ने झारखंड बीजेपी के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान से की मुलाकात

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मंगलवार रात केंद्रीय मंत्री और झारखंड बीजेपी के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। बीजेपी में शामिल होने से पहले चंपाई सोरेन और उनके बेटे बाबूलाल सोरेन ने शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की है।

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इससे पहले सोमवार रात को चंपाई सोरेन और बाबूलाल सोरेन ने असम के मुख्यमंत्री और झारखंड बीजेपी के सह प्रभारी हेमंता बिस्व सरमा के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद तय हुआ था कि चंपाई सोरेन 30 अगस्त को बीजेपी की रांची में सदस्यता लेंगे। 28 अगस्त को चंपाई जेएमएम से और राज्य सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देंगे।

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मंगलवार शाम को चंपाई सोरेन ने संताल में घुसपैठ को लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा था। इसमें उन्होने लिखा था कि जोहार साथियों,पिछले हफ्ते (18 अगस्त) एक पत्र द्वारा झारखंड समेत पूरे देश की जनता के सामने अपनी बात रखी थी। उसके बाद, मैं लगातार झारखंड की जनता से मिल कर, उनकी राय जानने का प्रयास करता रहा। कोल्हान क्षेत्र की जनता हर कदम पर मेरे साथ खड़ी रही, और उन्होंने ही सन्यास लेने का विकल्प नकार दिया।

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पार्टी में कोई ऐसा फोरम/मंच नहीं था, जहां मैं अपनी पीड़ा को व्यक्त कर पाता तथा मुझ से सीनियर नेता स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से दूर हैं।

आज बाबा तिलका मांझी और सिदो-कान्हू की पावन भूमि संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। इस से दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता है कि जिन वीरों ने जल, जंगल व जमीन की लड़ाई में कभी विदेशी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की, आज उनके वंशजों की जमीनों पर ये घुसपैठिए कब्जा कर रहे हैं। इनकी वजह से फूलो-झानो जैसी वीरांगनाओं को अपना आदर्श मानने वाली हमारी माताओं, बहनों व बेटियों की अस्मत खतरे में है।

आदिवासियों एवं मूलवासियों को आर्थिक तथा सामाजिक तौर पर तेजी से नुकसान पहुंचा रहे इन घुसपैठियों को अगर रोका नहीं गया, तो संथाल परगना में हमारे समाज का अस्तित्व संकट में आ जायेगा। पाकुड़, राजमहल समेत कई अन्य क्षेत्रों में उनकी संख्या आदिवासियों से ज्यादा हो गई है। राजनीति से इतर, हमें इस मुद्दे को एक सामाजिक आंदोलन बनाना होगा, तभी आदिवासियों का अस्तित्व बच पाएगा।

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इस मुद्दे पर सिर्फ भाजपा ही गंभीर दिखती है और बाकी पार्टियां वोटों की खातिर इसे नजरअंदाज कर रही है। इसलिए आदिवासी अस्मिता एवं अस्तित्व को बचाने के इस संघर्ष में, मैने माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं गृह मंत्री श्री @AmitShah जी के नेतृत्व में आस्था जताते हुए भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने का फैसला लिया है।

झारखंड के आदिवासियों, मूलवासियों, दलितों, पिछड़ों, गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं आम लोगों के मुद्दों एवं अधिकारों के संघर्ष वाले इस नए अध्याय में आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।

आपका,
चम्पाई सोरेन

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