JTET 2026 परीक्षा के आवेदन की तारीख बढ़ी, भाषा मुद्दे पर हाईलेवल कमेटी में मंत्रियों के बीच नहीं बनी सहमति

JTET 2026 परीक्षा के आवेदन की तारीख बढ़ी, भाषा मुद्दे पर हाईलेवल कमेटी में मंत्रियों के बीच नहीं बनी सहमति

रांचीः झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा(JTET) 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब अभ्यर्थी जून के पहले सप्ताह तक परीक्षा के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।जैक द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति (संख्या-34/2026) के अनुसार, इस परीक्षा के लिए आवेदन प्रपत्र 21 अप्रैल से ही ऑनलाइन आमंत्रित किए जा रहे हैं।इसी बीच, राज्य के कतिपय (कई) अभ्यर्थियों ने बोर्ड से आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। छात्रों की इसी मांग और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए परिषद ने फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि को विस्तारित कर 02 जून करने का निर्णय लिया है।परिषद के सचिव द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल आवेदन की तिथि में बदलाव किया गया है। इसके अलावा, पूर्व में जारी मूल विज्ञापन (विज्ञप्ति संख्या-24/2026) की अन्य सभी नियम और शर्तें पूरी तरह यथावत रहेंगी।जो अभ्यर्थी किसी कारणवश अब तक आवेदन नहीं कर पाए थे, वे जैक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय समय-सीमा के भीतर अपना फॉर्म ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं।

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भाषा विवाद में मंत्रियों के बीच नहीं बनी सहमति
वहीं जेटेट में जिलावार भाष की सूची में अंगिका, भोजपुरी और मगही को शामिल करने के मुद्दे में हाईलेवल कमेटी में आपसी सहमति नहीं बन पायी है। मंत्रियों की पांच सदस्यीय कमेटी की शुक्रवार को बैठक हुई। इस दौरान हालांकि तीनों भाषाओं को शामिल करने को लेकर कमेटी में बहुमत रहा। कमेटी के संयोजक व वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, ग्रामीण विकास विभाग की मंत्री दीपिका पांडे सिंह और श्रम व उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने तीनों भाषाओं को सूची में शामिल करने के पक्ष में अपनी दलील रही। वहीं झामुमो के दोनों मंत्रियों सुदिव्य कुमार सोनू और योगेंद्र प्रसाद ने इन भाषाओं को शामिल करने का विरोध किया।
बैठक में मंत्री सुदिव्य सोनू ने प्रस्ताव दिया कि इस हाईलेवल कमेटी में आदिवासी और अल्पसंख्यक जनप्रतिनिधि शामिल नहीं थे। उनका भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए। ऐसे में इस कमेटी को विस्तारित किया जाये। कमेटी के संयोजक वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि यह कमेटी की दूसरी और आखिरी बैठ है। बैठक में सारी बातें आ गयी हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी जायेगी। कमेटी का विस्तार कना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। कमेटी का विस्तार होता है, तो आगे बैठक होगी। इस अवसर पर कार्मिक सचिव प्रवीण टाप्पो, शिक्षा सचिव उमा शंकर सिंह और जैक सचिव जयंत मिश्रा मौजूद थे।
विरोध में यह दलील दी गयीः झारखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप झारखंडी भाषाओं को शामिल किया गया है। राज्य की 15 भाषाएं शामिल हैं और यह काफी है। इसमें पूरा राज्य समाहित है। अंगिका, भोजपुरी और मगही की पढ़ाई यहां नहीं होती है, ऐसे में इन भाषाओं को शामिल करने के बाद भी छात्रों को परेशानी होगी। अंगिका, भोजपुरी, मगही, मैथली जैसी भाषाओं को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
पक्ष में जो दलील दी गयीः झारखंड में अंगिका, मगही और भोजपुरी बोलने वाले बिहारी माने जायें। यह उचित नहीं है। राज्य की बड़ी आबादी इन भाषाओं को बोलती है। जेटेट में इन भाषाओं को शामिल नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इन भाषाओं को शामिल करने के बाद ही जेटेट की परीक्षा हो। इन भाषाओं को अगर शामिल नहीं किया गया, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव झारखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर पड़ेगा।
सीएम को कना है फैसलाः कमेटी के संयोजक व वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि हाईलेवल कमेटी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेज दी जायेगी। कमेटी अपनी अनुशंसा और बैठक की पूरी कार्यवाही भेजेगी। अब फैसला मुख्यमंत्री को करना है। वित्त मंत्री ने कहा कि दो-तीन दिनों में रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक पहुंच जायेगी। कमेटी की दो बैठकों में सारी बातें आ गयी। अब किसी बैठक की आवश्यकता नहीं है।

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