रांचीः सीबीआई ने रिश्वत लेने के मामले में एनएचएआई के दो अधिकारियों समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर झारखंड में एक राजमार्ग परियोजना से संबंधित लाखों रुपए घूस लेने का आरोप है। बीआई ने इस मामले में बीवीईपीएल के सीओओ को भी गिरफ्तार किया है।
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सीबीआई ने डीआरबी सदस्य के रूप में तैनात पूर्व इंजीनियर राकेश भसीन और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के उप प्रबंधक स्वतंत्र गौरव और विश्वजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर एक निजी कंपनी के पक्ष में फैसले लेने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप है।
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सीबीआई अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि झारखंड में एक राजमार्ग परियोजना से संबंधित 10 लाख रुपए से अधिक की रिश्वत लेने के मामले में इन्हें गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने इस मामले में भारत वाणिज्य ईस्टर्न प्राइवेट लिमिटेड (बीवीईपीएल) के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) मनीष मिश्रा और उनके कर्मचारी उमेश माथुर को भी गिरफ्तार किया है।
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आरोप है कि दिनेशचंद्र आर. अग्रवाल इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को झारखंड में भोगू और सांखा के बीच एक राजमार्ग को चार लेन का बनाने के लिए एनएचएआई द्वारा 818 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया था। कंपनी ने इस परियोजना को 769.36 करोड़ रुपए की लागत से एक निजी इंफ्रा डेवलपमेंट फर्म बीवीईपीएल को दे दिया था।
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सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि राकेश भसीन, गौरव और विश्वजीत सिंह ने 26 जून से 30 जून 2025 के बीच परियोजना की गुणवत्ता का आकलन किया था। बीवीईपीएल के सीओओ मनीष मिश्रा ने अपने कर्मचारी माथुर को भसीन को 5 लाख रुपए और सिंह को एक लाख रुपए देने का निर्देश दिया था ताकि अनुकूल ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त की जा सके। बाद में मनीष मिश्रा ने एक अन्य कर्मचारी से गौरव के दोस्त को भी 5 लाख रुपए की रिश्वत की एक और किश्त देने को कहा।
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एफआईआर में कहा गया है कि माथुर ने कथित तौर पर भसीन से जयपुर में मिलने का आग्रह किया। इस दौरान भसीन अनुकूल ऑडिट रिपोर्ट के लिए 4 लाख रुपए लेने पर राजी हो गए। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने एक अभियान चलाकर भसीन, गौरव, सिंह, माथुर और मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया।




