रांची में सेना की जमीन की बिक्री का मामला, सुप्रीम कोर्ट से ED को झटका, आरोपी दिलीप घोष की बेल कैंसिल की याचिका ख़ारिज, हेमंत सोरेन भी इसमें हैं एक आरोपी

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September 7, 2024

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने  प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें रांची में भारतीय सेना की 4.55 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़े मनी लॉड्रिंग  मामले में एक आरोपी को जमानत दिए जाने को चुनौती दी गई थी। इस मामले में कथित तौर पर नकली संपत्ति दस्तावेज तैयार किए गए थे।

ED ने हेमंत सोरेन को बनाया था आरोपी

ग़ौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में भी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आरोपी बनाया था । जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि आरोपी दिलीप घोष को जमानत देने के झारखंड उच्च न्यायालय के 28 नवंबर, 2023 के आदेश को अन्य सह-आरोपियों के मामलों में उदाहरण नहीं माना जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने की यह टिप्पणी

पीठ ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा, “इन परिस्थितियों में, मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना, यह स्पष्ट करते हुए कि हाई कोर्ट  का निर्णय अन्य सह-आरोपियों के लिए मिसाल नहीं बनेगा और उसमें की गई किसी भी टिप्पणी का निचली अदालत/विशेष अदालत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, हम इसमें हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।”

मुकदमा जल्द शुरु करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विशेष अदालत को मुकदमे में तेजी लाने का निर्देश दिया और बताया कि घोष और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हैं और मुकदमा जल्द शुरू होगा।

ईडी कर सकती है कार्रवाई , मगर…

पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को यह भी स्वतंत्रता दी कि अगर उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई जमानत शर्तों का उल्लंघन होता है या विलंब की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो वह उच्च न्यायालय में घोष की जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।

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दिलीप घोष से मांगे गए थे बैंक स्टेटमेंट

29 अगस्त को सेना की भूमि की बिक्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए घोष के बैंक स्टेटमेंट मांगे गए थे। ईडी ने दावा किया था कि भारतीय सेना की 4.55 एकड़ जमीन को नकली दस्तावेजों के जरिए गैर-मालिकों द्वारा बेचा गया था।जांच एजेंसी ने कहा कि रांची के बरियातू इलाके के निवासी अफसर अली और उसके साथियों ने कोलकाता के आरओए (रिकॉर्ड के रजिस्ट्रार) के कार्यालय में प्रफुल्ल बागची के नाम से एक फर्जी दस्तावेज तैयार किया, जिसमें दावा किया गया कि जमीन प्रफुल्ल बागची की है।

कुछ आरोपियों ने संपत्ति के लिए एक होल्डिंग नंबर प्राप्त किया और इसे मेसर्स जगतबंधु टी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (जेटीईपीएल) को बेचने की पेशकश की, जिसके दिलीप घोष निदेशक हैं।

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