हजारीबाग वन-भूमि घोटाले में बीजेपी विधायक प्रदीप प्रसाद भी आरोपी: एसीबी जांच तेज

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October 28, 2025

bjp mla pradeep prasad

हजारीबाग — जिले के चर्चित वन-भूमि घोटाले में अब भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद को भी अपराधी बनाया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) का आरोप है कि विधायक ने प्रतिबंधित वन-भूमि खरीदने के साथ कुछ जमीनों का पावर भी अनुचित तरीके से सुरक्षित कराया था। इससे पहले नेक्सजेन ऑटोमोबाइल के संचालक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह तथा तत्कालीन उपायुक्त विनय कुमार चौबे पर भी आरोप लगाए जा चुके हैं।

निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे एवं नेक्सजेन के संचालक विनय सिंह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एसीबी अब विधायक प्रदीप प्रसाद के विरुद्ध भी कार्रवाई करने की तैयारी में है—ऐसा आरोप है कि प्रदीप प्रसाद ने कारोबारी विनय सिंह की रजिस्ट्री में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए थे। एसीबी ने मामले में हजारीबाग के तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार और जमीन दलाल विजय सिंह को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था।

एसीबी ने विधायक के माध्यम से खरीदी गई जमीनों का विस्तृत ब्यौरा खंगाला है और जांच अभी जारी है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को वन-भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े साक्ष्य मिले हैं—एसीबी उन सभी जमीनों की पुर्नपरीक्षा कर रही है जिनका संदर्भ आरोपों में आया है।

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एसीबी ने एसीबी थाना हजारीबाग में दर्ज कांड संख्या 11/2025 में निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे, नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह व उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह समेत कई अन्य व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। जांच के दस्तावेजों के अनुसार विनय सिंह ने वर्ष 2010 में हजारीबाग के सदर अंचल के बभनवे मौजा के खाते नंबर 95 के तीन प्लाट (कुल 28 डिसमिल) और खाते नंबर 73 के एक प्लाट (72 डिसमिल) पर वन-भूमि की रजिस्ट्री करवाई थी।

इस मामले की शुरुआती शिकायत के बाद एसीबी ने प्रारंभिक जांच (पीई) की थी, जिसमें बड़ी अनियमितताओं का संकेत मिला। पीई के आधार पर मंत्रिमण्डल निगरानी एवं सचिवालय विभाग से अनुमति लेकर एसीबी ने नियमित प्राथमिकी दर्ज कर गहन जांच शुरू की है।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने स्थायीन मीडिया के सामने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि सच्चाई छिपती नहीं। उन्होंने कहा कि एसीबी पूरे मामले की जांच कर लेसारे आरोप बेबुनियाद हैं। उनका बयान है कि जिन जमीनों का सवाल उठाया जा रहा है, वे 1915 से रजिस्टर्ड हैं और 110 साल पुरानी रजिस्ट्री गलत कैसे हो सकती है। वे बताते हैं कि पिछले 35–40 वर्षों से उन जमीनों पर कोल्ड स्टोरेज और कत्था फैक्ट्री जैसी संस्थाएं चल रही हैं और जमींदारी काल से चली आ रही संपत्ति को अब अचानक वनभूमि करार दिया जा रहा है। प्रदीप प्रसाद ने कहा कि सत्य की जीत होगी और वह जांच में दस्तावेजी सबूतों के साथ अपना पक्ष रखेंगे।

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