सांप के जहर से बचने के लिए क्या घर में रख सकते हैं दवा, सांप के काटने पर क्या नहीं करें?

Picture of Live Dainik

Live Dainik

July 12, 2024

snackbite injection

भारत में बारिश शुरू होते ही सांप के काटने (स्नेक बाइट) के मामले बढ़ जाते हैं। पानी की वजह से सांप अपने बिल से बाहर निकलता है जान जोखिम में होने की स्थिति में वह लोगों को काट लेता है। लेकिन इससे बचाव के उपाय भी हैं, जिसको करने से लोग सांप कटाने के बाद भी बच सकता है। हाल में झारखंड और बिहार में सांपों के काटने की वजह से कई लोगों की जान चली गई है।

ऑस्ट्रेलियाई समेत कई देश हैं, जहां सांपों की सबसे जहरीली प्रजातियां होने के बाद भी वहां के लोगों को कम ही नुकसान पहुंचता है. यहां लोग इस बात के लिए भी तैयार रहते हैं कि सांप काट ले तो पहले एंटीवेनम दवा लें, तब फटाफट अस्पताल जाएं।

अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहतः ED केस में सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत, जेल में ही अभी रहेंगे बंद

ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा जहरीले सांप

आस्ट्रेलिया को पूरी दुनिया में जीव-जंतुओं के मामले में सबसे खतरनाक माना जाता रहा। यहां मगरमच्छों से लेकर जहरीली मकड़ियां और सबसे ज्यादा जहरीले सांप भी हैं। इस द्वीप देश में वैसे तो डेढ़ सौ से ज्यादा जहरीले स्नेक्स हैं, लेकिन इनमें से भी 21 किस्में सबसे वेनमस मानी जाती हैं। लेकिन इसके बाद भी ऑस्ट्रेलिया में स्नेक बाइट से मौत बहुत कम होती रही।

इसके वैसे तो कई कारण हैं, जैसे ऑस्ट्रेलियाई लोगों को पता है कि कहां जाना टालना है, या फिर सांप से मुठभेड़ हो ही जाए तो भागने या उसे मारने की बजाए दम साधकर खड़ा हो जाना है। इसके अलावा एक कारण और भी है, जो स्नेक बाइट के बावजूद यहां के लोगों को नुकसान नहीं पहुंचता।

See also  Orry और उसके दोस्तों ने वैष्णों देवी मंदिर के पास पी थी शराब, आठ लोगों पर दर्ज हुआ केस

झारखंड हाईकोर्ट के अगले चीफ जस्टिस होंगे एमएच रामचंद्र राव, जानिये कौन है नये मुख्य न्यायाधीश

भारत में सबसे ज्यादा मौत

हमारे देश में सांप कटाने से किसी भी और जगह की तुलना में कई गुना ज्यादा मौतें होती रहीं। प्रीमैच्योर मृत्यु पर स्टडी करने वाली संस्था मिलियन डेथ स्टडी ने साल 2020 में ये खुलासा किया था कि भारत में सालाना 58 हजार लोग सांपों के काटने से मरते हैं। स्मिथसोनियन की रिपोर्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के हवाले से ये तक दावा किया गया कि हमारे यहां मौजूद सांपों के जहर से बचने के दवाएं भी उतनी असरदार नहीं। लेकिन इससे भी ज्यादा बड़ी बात है कि कई घंटों तक पीड़ित घरेलू इलाज में ही पड़ा रहा जाता है। इससे अस्पताल पहुंचने पर वो या तो बच नहीं पाता, या अपंग हो चुका होता है।

क्या हैं एंटीवेनम दवाएं

सांप के काटने पर एंटीवेनम दिया जाता है। ये रूल पूरी दुनिया में एक समान है। दवा अपने-आप में कई तरह के जहर का मिश्रण होती है जो सांप के जहर को बेअसर कर देती है। ऑस्ट्रेलिया में यह अलग तरह से बनती है। सांपों की मौजूदगी इस देश में इतनी कॉमन है कि लगभग सभी लोग अपने घर पर फर्स्टएड बॉक्स में ही एंटीडोट रखते हैं। इसकी उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है कि सांप काटने पर कैसे तुरंत दवा लेकर अस्पताल पहुंचे।

See also  मटर चोरी के आरोप में चार मासूम के साथ शर्मनाक हरकत, दबंगों ने हाथ-पैर बांधकर गांव में घुमाया

दवा के बाद अस्पताल की क्यों जरूरत

एंटीवेनम देने के बाद सांप के जहर का असर तो खत्म होने लगता है, लेकिन शरीर में एलर्जिक रिएक्शन पैदा हो सकता है। इसे एनाफिलैक्सिस कहते हैं। ये बेहद गंभीर, जानलेवा स्थिति है, जो कुछ ही सेकंड्स या मिनटों में पैदा हो सकती है। यही वजह है कि सांप काटने पर एंटीवेनम के बाद भी अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है। वहां मरीज को जरूरी दवाएं दी जाती हैं और निगरानी में रखा जाता है ताकि जहर और एंटी-एलर्जी दोनों के असर को खत्म किया जा सके।

लोहरदगा में युवा सर्राफा कारोबारी का खेत में मिला शव, पुलिस ने हत्या के मामले में रांची से दो दोस्तों को किया अरेस्ट

कई देश एंटीवेनम का उत्पादन करते हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया के साथ ब्राजील, पेरू, कोलंबिया, वेनेजुएला और अर्जेंटिना भी शामिल हैं। हमारे यहां भी सांप के जहर की काट बनाने का काम कई फार्मास्युटिकल लैब करते आए हैं। ये एंटीडोट सांपों के जहर से ही बने होते हैं।

क्या विदेशों की तरह यहां भी घर पर रख सकते हैं एंटीवेनम

वैसे तो ऐसा किया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसी सलाह नहीं दी जाती। एंटीवेनम रखते हुए कई सावधानियां रखनी होती हैं, जैसे एक खास तापमान पर और बिल्कुल साफ-सूखे स्थान पर ही दवा रखी जा सकती है। इसकी एक्सपायरी डेट भी होती है। कई दवाएं अलग-अलग तरह से काम करती हैं। ये भी देखना होता है कि किस जहर पर क्या काम करेगा।

See also  रांची के ओरमांझी में बस ने युवती को मारी टक्कर, नाराज लोगों ने बस में लगाई आग

ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए ट्रेनिंग भी मिलती है। यहां वो सुविधा शायद न मिल सके। यही वजह है कि एंटीवेनम घर पर कम ही लोग रखते होंगे। सांप काटने पर एक खुराक से काम नहीं चलता। कई बार ज्यादा जहरीली बाइट पर दवाओं की कई शीशियां लग जाती हैं। अस्पताल में इसपर नजर रखना आसान है।

सांप काटने पर गलत एंटीवेनम लेने से इलाज तो बेकार हो ही जाता है, मरीज की स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे बचने के लिए साल 1979 में ही ऑस्ट्रेलिया ने स्नेक वेनम डिटेक्शन किट तक बना दी। ये किट पहचान करती है कि पीड़ित को किस सांप ने काटा है, ताकि उसी अनुसार दवा दी जा सके।

Land Scam: कमलेश के यहां ईडी ने की रेड, तो कांके CO ने डिलीट कर दिए रिकॉर्ड

सांप काटने पर तुरंत क्या करें, क्या नहीं

सांप काटने पर प्रभावित जगह को चूसने से असर कम नहीं होता, बल्कि ये करना और घातक हो सकता है।

घाव के आसपास तुरंत मार्क कर दें ताकि अस्पताल में डॉक्टर सूजन देख सके।

काटी हुई जगह पर न तो पानी लगाएं, न बर्फ की या किसी गर्म चीज से सेंक दें।

दर्द की कोई भी दवा लिए बगैर सीधे इमरजेंसी पहुंचे।

स्नेकबाइट अगर हाथ या पैर में हो तो सारे गहने या घड़ी-अंगूठी उतार दें।

जिस हिस्से में सांप ने काटा हुआ हो, उसकी मूवमेंट कम कर दें ताकि असर आगे न बढ़े।

काटी हुई जगह के आसपास कपड़ा न बांधें. इससे खून का फ्लो कम होने पर अंग काटने की नौबत आ सकती है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now