लातेहारः जिले के पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव के नेतृत्व में अफीम की खेती के खिलाफ संभावित इलाकों में पुलिस विभाग के द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है. जिन इलाकों में कभी अफीम की खेती हुई थी खासकर उन इलाकों में जागरूकता टीम के द्वारा लोगों को बताया जा रहा है कि अफीम की खेती करते पकड़े गए तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी. क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी इस प्रकार की खेती पर नजर बनाए रखना के लिए जागरूक किया जा रहा है. ग्रामीणों को इस बात के लिए भी जागरूक किया जा रहा है कि अपनी आजीविका के लिए अपने खेतों में सब्जी अथवा कोई अन्य फसल उगाएं.
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दरअसल लातेहार जिले के हेरहंज, बालूमाथ, बारियातू और चंदवा के कुछ इलाकों में अफीम की खेती की की जाती है. बताया जाता है कि बाहरी तस्करों के द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को लालच देकर घने जंगलों में स्थित वन भूमि और सुदूरवर्ती इलाकों में स्थित सरकारी जमीनों में अफीम की खेती कराई जाती है. अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से लेकर नवंबर के दूसरे सप्ताह तक इसकी खेती की जाती है. परंतु इस बार लातेहार एसपी कुमार गौरव ने यह लक्ष्य रखा है कि लातेहार जिले में अफीम की खेती बिल्कुल ना हो. इसी उद्देश्य को लेकर ग्रामीणों को पहले से ही अफीम की खेती के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है. जागरूकता अभियान के दौरान ग्रामीणों को यह बताया जा रहा है कि अफीम की खेती करने से क्या-क्या नुकसान हो सकता है. इसके अलावे कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी ग्रामीणों को दी जा रही है.
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अफीम की खेती करते पकड़े जाने पर हो सकती हैं जेल
जागरूकता अभियान के क्रम में ग्रामीणों को यह भी बताया जा रहा है कि यदि कोई भी ग्रामीण अफीम की खेती में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जो लोग अफीम की खेती में संलिप्त पाए जाएंगे, उन्हें कड़ी सजा मिल सकती है.

जमीन से लेकर आने वाली पीढ़ियों का जीवन होगा बर्बाद- एसपी
इधर इस संबंध में लातेहार एसपी कुमार गौरव ने बताया कि लातेहार जिले के उन इलाकों में ,जहां अफीम की खेती की संभावना बनी रहती है, वहां अफीम की खेती के पूर्ण रोकथाम को लेकर पुलिस प्रशासन के द्वारा आईपीआरडी विभाग के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को यह बताया जा रहा है कि अफीम की खेती होने से जमीन की उर्वरा शक्ति पूरी तरह नष्ट हो जाती है और जमीन धीरे-धीरे बंजर हो जाती है. इसके अलावा अफीम की खेती से आने वाली पीढ़ियों पर भी काफी दुष्प्रभाव पड़ेगा. अफीम की खेती करने वाले लोगों के खिलाफ कड़े कानून बने हुए हैं. ग्रामीणों को इन सभी बिंदुओं पर व्यापक पैमाने पर जागरूक किया जा रहा है. इसके अलावा ग्रामीणों को इस बात के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है कि वह अपने जमीन में सब्जी अथवा फलदार वृक्ष लगाए. इसके लिए संबंधित किसानों को हर प्रकार की मदद भी की जाएगी. सब्जी की खेती या फलदार वृक्ष लगाने से उनकी आजीविका के साधन भी बढ़ेंगे और उन्हें अच्छी आमदनी भी होगी.
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पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मियों को भी किया जा रहा है जागरूक
एसपी कुमार गौरव ने बताया कि अफीम की खेती के रोकथाम को लेकर पंचायत के जनप्रतिनिधियों तथा सरकारी कर्मियों को भी अलर्ट किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पंचायत के प्रतिनिधियों के साथ-साथ संबंधित इलाके में कार्यरत वनकर्मी, पंचायत कर्मी, चौकीदार आदि की भी जिम्मेवारी है कि उनके इलाके में अफीम की खेती ना हो. यदि कोई अफीम की खेती करता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को देनी होगी. यदि सूचना देने में लापरवाही की गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की जाएगी. इसलिए सभी संबंधित पंचायत कर्मी और पंचायत प्रतिनिधि इस मामले को लेकर पूरी तरह अलर्ट रहें.
गत वर्ष किया गया था 800 एकड़ भूमि में अफीम की खेती को नष्ट
गत वर्ष भी लातेहार एसपी कुमार गौरव के नेतृत्व में पुलिस ने अफीम की खेती के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था. इस दौरान पुलिस ने विभिन्न इलाकों में अभियान चलाकर लगभग 800 एकड़ भूमि में लगे अफीम की खेती को नष्ट कर दिया था. पुलिस की इस कार्रवाई से अफीम तस्करों की कमर टूट गई थी. लातेहार एसपी कुमार गौरव ने बताया कि पिछले वर्ष 800 एकड़ से भी अधिक भूमि में लगे अफीम की खेती को नष्ट किया गया था. कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी.





