पटनाः मसौढ़ी इलाके में स्थित ठाकुरवाड़ी मंदिर से दो महीने पहले चोरी हुई मूर्तियां और जेवरात आखिरकार रहस्यमय तरीके से वापस मिल गई हैं। बताया जा रहा है कि 16 मार्च 2026 की रात को मसौढ़ी के छाता ठाकुरबाड़ी से करीब 200 वर्ष पुरानी भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की अष्टधातु की तीन मूर्तियां चोरी हो गई थीं। इसके साथ ही चांदी के दो मुकुट भी चोरी हो गए थे। हैरानी की बात यह है कि जिन मूर्तियों को खोजने में पुलिस दो महीने तक नाकाम रही, वे अब सड़क किनारे लावारिस हालत में कपड़े में लिपटी बरामद हुईं। ग्रामीण इसे भगवान का चमत्कार और चोरों पर दैवीय भय का असर बता रहे हैं। इन मूर्तियों की कीमत करीब सात से आठ करोड़ बताई जाती है। मूर्तियां करीब दो सौ साल पुरानी थी। उसे वर्ष 1935 में उक्त ठाकुरबाड़ी में स्थापित किया गया था। सभी मूर्तियों पर चांदी का मुकुट था।

गांव में जय श्री राम के लगे नारे:गायब मूर्तियों के मिल जाने की खबर आग की तरह छाता एवं आसपास के गांवों में फैल गई और मूर्ति देखने को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जुट गए। इससे ग्रामीणों में खुशी व्याप्त थी। बाद में ग्रामीण उसे एक पेड़ के पास चबूतरे पर रख दिए। इसके बाद वहां पूजा पाठ व भजन कीर्तन शुरू हो गया। डीजे पर भी धार्मिक गीत बजनी शुरू हो गई। मूर्तियों के बरामद होते ही पूरे गांव में खुशी और उत्सव का माहौल बन गया। ‘जय श्री राम’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
पुलिस दबिश के बाद चोर छोड़कर भागे
कहा जा रहा है कि इन मूर्तियों को बरामद करने के लिए पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी चोरी गई मूर्तियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। मसौढ़ी थाना के छाता गांव में स्थित कल्लू ठाकुरबाड़ी मंदिर से करीब दो माह पूर्व गायब हुई अष्टधातु की श्री राम, जानकी, लक्ष्मण की मूर्तियां शाहाबाद- लखनौर सीमा पर सड़क किनारे रखी हुई मिली। चोरी हुई मूर्तियां सड़क किनारे कपड़े में लिपटी पड़ी थीं। भगवान की मूर्तियां बरामद होने की खबर मिलते ही पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव वाले इसे भगवान का चमत्कार बता रहे हैं।
100 साल पुरानी बताई जाती हैं मूर्तियां : मंदिर कमेटी के अनुसार कल्लू ठाकुरबाड़ी की स्थापना वर्ष 1935 में हुई थी। यहां स्थापित राम-जानकी-लक्ष्मण की मूर्तियां 100 साल से भी अधिक पुरानी मानी जाती हैं। इन मूर्तियों का धार्मिक और भावनात्मक महत्व पूरे गांव के लिए बेहद खास है। चोरी के बाद लोगों में भारी आक्रोश और दुख था।


