डेस्कः राजस्थान की दौसा पुलिस ने नकली नोट छापने और उसकी सप्लाई करने वाले एक अंतरराज्जीय गिराह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने फरीदाबाद से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गढ़वा के खरौंदी निवासी विशाल उपाध्याय और अलीगढ़ निवासी संतोष सिंह वाल्मीकि शामिल है।
पुलिस के अनुसार ये दोनों इस गिरोह के मास्टरमाइंड हैं। ये दोनों नोएडा में रहकर हरियाणा के फरीदाबाद से यह रैकेट चला रहा था। पुलिस ने इनके ठिकाने से प्रिंटिंग मशीनें और 24.84 लाख रुपए के नकली नोट बरामद कियए हैं। दौसा के एडिशनल एसपी शंकरलाल मीणा के मुताबिक गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े हैं। पुलिस ने तकनीकी इनपुट के आधार पर एक जून को इन दोनों को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया।
35 हजार में देते थे 1 लाख के नकली नोट
पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि यह गिरोह चार-पांच महीने से बाजार में नकली नोट चला रहे थे। वे एक तिहाई दाम पर नकली नोटों की सप्लाई करते थे। यानी 35 हजार में एक लाख रुपए के नकली नोट देते थे। नकली नोटों को इतनी बारीकी से छापा जाता था कि पहली नजर में इसे पहचानना मुश्किल होता था कि ये असली हैं या नकली नोट। लेकिन पेपर की क्वालिटी थोड़ी खराब थी। इसे छूने के बाद लोगों को शक हो जाता था।
दुकानदार को दिया 500 का नोट, शक होने पर पुलिस को दी सूचना
इस गिरोह का खुलासा 28 मई को हुआ। दरअसल दौसा में एक दुकानदार को एक लड़के ने 500 रुपए का नकली नोट थमा दिया। दुकानदार को शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दौसा के आयुष कुमार मीना और अलवर के एक नाबालिग को गिरफ्तार किया। इन्होंने दिल्ली-एनसीआर से जुड़े इस रैकेट के मास्टरमाइंड विशाल उपाध्याय और संतोष सिंह वाल्मीकि का नाम लिया। फिर पुलिस ने फरीदाबाद में छापा मारकर इन दोनों को गिरफ्तार किया। पुलिस जब इनके ठिकाने पर पहुंची तो आरोपी लाखों रुपए के नोट छाप चुके थे। बस उसकी कटाई बाकी थी। वे इसे राजस्थान और अन्य राज्यों में खपाने की तैयारी में थे। पुलिस के मुताबिक ये दोनों नोएडा में रहते थे और फरीदाबाद से नकली नोटों का रैकेट चला रहे थे।


