डेस्कः बिहार के शिवहर जिले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने जिला कृषि कार्यालय में पदस्थापित बड़ा बाबू बिजेन्द्र कुमार को 8,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस मामले में निगरानी थाना में 11.05.2026 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
दुकान के लाइसेंस के एवज में रिश्वत: माधोपुर सिंगाही, थाना पिपराही निवासी मनीषा देवी ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि खाद एवं बीज की दुकान का लाइसेंस बनवाने के लिए वह जिला कृषि कार्यालय गई थी, लेकिन बड़ा बाबू बिजेन्द्र कुमार ने लाइसेंस जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की। परिवादिनी ने कहा कि उन्होंने बड़ी रकम की मांग पर आपत्ति जताई तो 8 हजार रुपये देने पर सहमति बनी।
सत्यापन के बाद ट्रैप: निगरानी ब्यूरो द्वारा शिकायत की गहन जांच की गई। सत्यापन में आरोपी द्वारा रिश्वत मांगने का प्रमाण मिलने के बाद प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक शिव कुमार साह के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया। टीम ने पूरे मामले की निगरानी की और आरोपी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।
क्या कहते हैं विजिलेंस के डीएसपी: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक शिव कुमार साह ने बताया कि परिवादी मनीषा देवी की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की गई। सत्यापन में लाइसेंस जारी करने के बदले रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद कांड दर्ज कर अनुसंधान के दौरान बड़ा बाबू को उनके कार्यालय कक्ष से 8,000 रुपये रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया।
सरकारी काम में रिश्वत की मांग: परिवादी मनीषा देवी ने बताया कि वे केवल खाद का लाइसेंस लेने गई थीं, लेकिन अधिकारी ने बिना पैसे दिए काम न करने की बात कही। उन्होंने कहा, “हमने उतनी बड़ी रकम देने से इनकार किया तो उन्होंने 8 हजार रुपये पर राजी हो गए.” इस घटना ने आम नागरिकों के बीच सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर फिर से आक्रोश पैदा कर दिया है।

