डेस्कः पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे है। बुधवार को असम की महिला नेत्री सुष्मिता देव जिन्हें 2023 में कांग्रेस से लाकर उन्होंने राज्यसभा का सांसद बनाया था उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्व सरमा ने मुलाकात की और माना जा रहा है कि असम के एक उपचुनाव में वो उम्मीदवार हो सकती है। ममता बनर्जी को दूसरा और सबसे बड़ा झटका सयाली घोष के रूप में लगा है। टीएमसी के 20 बागी सांसदों में सयाली घोष का भी नाम है जिन्होंने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अगल बैठने और एनडीए को समर्थन करने का ऐलान किया है।
सयानी घोष पश्चिम बंगाल की एक प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री, गायिका और तृणमूल कांग्रेस की सांसद है। वह वर्तमान में जादवपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली लोकसभा सांसद हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गाए गए उनके गाने ‘मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीनाट के लिए काफी चर्चा और विवाद का सामना करना पड़ा था।
बीजेपी नेताओं ने सयानी घोष के इस गाने को लेकर ममता बनर्जी को निशाने पर लिया था और मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाए थे।लेकिन अब उसी बीजेपी को समर्थन करने का ऐलान टीएमसी के बागी सांसदों ने किया है। इसमें सयानी घोष भी शामिल हो गई हैं।
आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले राघव चड्ढा पर सयानी घोष ने एक चुनावी जनसभा के दौरान निशाना साधा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, मैं चड्ढा नहीं हूं जो ‘चड्डी’ बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।’ सायोनी के इस बयान पर बीजेपी ने सख्त नाराजगी जाहिर की थी।
सयानी घोष की सियासी पारी
2021 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सयानी घोष ने टीएमसी का दामन थामा था.वो एक महिला और युवा होने के साथ-साथ ख़ासी चर्चित भी थीं। बांग्ला फ़िल्मों ने उन्हें समूचे बंगाल में पहचान दी और राजनीति में आने से पहले ही वो सांस्कृतिक जगत का एक चर्चित चेहरा बन चुकी थीं।पार्टी में शामिल होने के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें आसनसोल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार से हार गईं। इसके बाद पलटकर नहीं देखा और तेजी से राजनीति में आगे बढ़ी।
साल 2021 में ही सयानी घोष को त्रिपुरा में गिरफ़्तार भी किया गया था। त्रिपुरा में स्थानीय चुनावों के समय सयानी ने बीजेपी की एक नुक्कड़ सभा के पास से गुज़रते हुए नारा लगाया था ‘खेला होबे’।इस नारेबाज़ी के बाद अगरतला के एक पुलिस थाने में सयानी घोष पर मुक़दमा दर्ज लिया गया था और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था।
2024 में जाधवपुर से सांसद बनी
पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले की जांच कर रही ED ने उनसे 10 घंटों तक पूछताछ की तो चर्चा के केंद्र में आ गईं। 1993 में कोलकाता में पैदा हुईं सयानी घोष टीएमसी राजनीति के सबसे चर्चित युवा चेहरों में से एक हैं। सयानी घोष 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर सांसद बनी। 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की स्टार प्रचारक रही, लेकिन सत्ता बदलते ही उनका भी मन बदल रहा।


