- Advertisement -
CM-Plan AddCM-Plan Add

रामगढ़ में रांची-पटना NH पर हाथियों के झुंड आने से दहशत, वन विभाग के पसीनें छूटे, अब तक ले चुकी हैं 6 लोगों की जान

रामगढ़ में रांची-पटना NH पर हाथियों के झुंड आने से दहशत, वन विभाग के पसीनें छूटे, अब तक ले चुकी है 6 लोगों की जान

रामगढ़ः जंगली हाथियों का एक झुंड शनिवार को रांची-पटना एचएच पर दिखा। सुबह-सुबह हाथियों के झुंड को देखने के बाद लोगों की सांसे थम गई। वन विभाग के तमाम दावे और मशक्त के बाद भी हाथियों के झुंडा रामगढ़ में उत्पात जारी है। रामगढ़ में पिछले चार दिनों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है।

झारखंड में हाथियों का कहर जारी, 24 घंटे के अंदर कई लोगों को कुचला, दो महिला समेत पांच की मौत
रामगढ़ डिवीजन में हाथियों के आतंक से दहशत है। कुजू में स्कूल को बंद कर दिया गया है। शनिवार को जब हाथियों का झूंड रांची-पटना एनएच से गुजरा तो वन विभाग के पसीनें छूट गए। आबादी वाले इलाकों में बढ़ते खतरे को देखते हुए रामगढ़–कुजू वन क्षेत्र में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को और मजबूत किया गया है। इसी क्रम में हजारीबाग से 14 सदस्यीय अतिरिक्त टीम आज रामगढ़ पहुंची और अभियान में शामिल हुई।

See also  गिरिडीह में ज्वेलरी शॉप से 12 लाख के गहने की चोरी, CCTV में कैद हुई वारदात

TSPC के डर से पिपरवार में कोयला कारोबार पर ब्रेक, कथित धमकी से फैला सन्नाटा
कुजू रेंजर बटेश्वर पासवान ने बताया कि पिछले चार दिनों से वन विभाग लगातार हाथियों को आबादी से दूर सुरक्षित जंगलों की ओर खदेड़ने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, हाथियों का झुंड चार हिस्सों में बंट जाने के कारण अभियान में चुनौतियां आ रही हैं। इसके बावजूद टीम ने आधे से अधिक हाथियों को बोकारो जंगल की दिशा में सफलतापूर्वक मोड़ दिया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान रात भर आग के गोले, मशालें, स्प्रे मशाल और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रात में हाथियों से आमना-सामना होने पर इन्हीं साधनों के जरिए उन्हें धीरे-धीरे जंगल की ओर खदेड़ा जा रहा है। झुंड के बिखराव के कारण पूरी सफलता अभी नहीं मिली है, लेकिन अभियान निरंतर जारी है।

4 साल के बेटे का शव थैले में ले गया बेबस पिता, झारखंड के चाईबासा में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना आई सामने
इस रेस्क्यू टीम में लगभग दो दर्जन कर्मी शामिल हैं, जो छह से सात चारपहिया वाहनों के साथ जंगल क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं। टीम का भोजन भी सामूहिक रूप से तैयार कर जंगल क्षेत्र में ही किया जाता है, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।
वन विभाग तो खुद का लक्ष्य —हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी पर रखते हुए उन्हें घने जंगलों में वापस पहुंचाने का रखता है लेकिन इलाके के वन अधिकारियों को हाथियों की आने-जाने की कोई जानकारी वक्त रहते नहीं मिलती है । ना तो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं औऱ ना ही हाथियों के लिए सुरक्षित जगह बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं । झारखंड के अलग-अलग इलाकों में हाथियों की वजह से हर साल सैकड़ों लोगों की जान जाती है बावजूद इसके वन विभाग कोई ठोस कदम उठाता हुआ नजर नहीं आता।

See also  सरायकेला-खरसावां के SP मनीष टोप्पो का तबादला, मुकेश लुनायत को बनाया गया नया पुलिस अधीक्षक
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now