रांचीः रिम्स क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक परिवार ने अपने छह वर्षीय बेटे के निधन के बाद उसका नेत्रदान कर दो लोगों को नई रोशनी दी।रिम्स आई बैंक की टीम ने तत्परता दिखाते हुए प्रक्रिया पूरी की और दोनों कार्निया का सफल प्रत्यारोपण किया।एक पिता ने अपने 6 साल के बेटे की आंखें दान करने का साहसिक निर्णय लिया, जो ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहा था। बेटे की मृत्यु के बाद, उसकी आंखों से दो लोगों को रोशनी मिली।प्रबंधन ने जानकारी दी कि पिछले सप्ताह होचर कांके निवासी सुजीत मुंडा के छह वर्षीय बेटे का इलाज रिम्स में चल रहा था।
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वह न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती था, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस कठिन घड़ी में भी परिजनों ने साहस का परिचय देते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। रिम्स आई बैंक की टीम ने परिवार से संपर्क कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की और निकाले गए कार्निया को आई बैंक में सुरक्षित रखा।रिम्स नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि कि दोनों कार्निया का सफल उपयोग कर दो जरूरतमंद दृष्टिहीन मरीजों में कार्निया प्रत्यारोपण किया गया। अब वे दोनों मरीज देख पा रहे हैं।
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सबसे कम उम्र का नेत्रदान
यह अभी तक का सबसे कम उम्र का नेत्र दान रहा है। चिकित्सकों के अनुसार कार्निया को मृत्यु के छह घंटे के भीतर सुरक्षित निकालना आवश्यक होता है, ताकि उनका सफल प्रत्यारोपण किया जा सके।बच्चे के स्वजनों ने भावुक होते हुए कहा कि उनका बेटा भले इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी आंखें अब किसी और की दुनिया रोशन कर रही हैं। यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है कि मृत्यु के बाद भी जीवन बांटा जा सकता है।चिकित्सकों ने इसे समाज के लिए प्रेरक पहल बताया और अधिक से अधिक लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की है।




