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निशा भगत के मौत की CBI जांच की मांग, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी नेत्री के पिता से की मुलाकात

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Live Dainik

November 7, 2026

निशा भगत के मौत की CBI जांच की मांग, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी नेत्री के पिता से की मुलाकात

रांचीः झारखंड की उभरती हुई आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत को लेकर राजनीतिक तापमान गर्म हो गया है। एक ओर बीजेपी-आजसू और जेएलकेएम ने इस मामले को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रही है। वहीं दूसरी ओर जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा है कि ये बहुत ही दुखःद घटना है कि आदिवासी समाज की बेटी की इस तरीके से मौत हो गई। वो सरकार और नेता की आलोचना कर सकती है लेकिन वो हमारी दुश्मन नहीं हो सकती है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि किन परिस्थिति में उन्होंने आत्महत्या की, बहुत ही दुख की बात है कि बीजेपी के लोग ऐसे समय में इस तरह की राजनीति कर रहे है।

वहीं शनिवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुमला जाकर निशा भगत के पिता हंदु भगत से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने निशा भगत की मौत की सीबीआई जांच कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी, चाहे इसमें कितना भी समय क्यों न लगे। राज्य सरकार को स्वयं सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी चाहिए, अन्यथा उसे पछताना पड़ेगा। मरांडी ने आरोप लगाया कि निशा भगत को पहले से धमकियां दी जा रही थीं। चार माह पूर्व पिठौरिया स्थित उसके घर पर लूटपाट की घटना को लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि एक सुनियोजित साजिश के तहत निशा भगत को प्रताड़ित किया गया और उन्हें ऐसा कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा। जांच में इस साजिश से जुड़े सभी लोगों की भूमिका सामने लाई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

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उन्होंने निशा भगत को साहसी और हिम्मती लड़की बताते हुए कहा कि वह जनजातीय समाज और सनातन परंपराओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहती थीं। उनका भाजपा या आरएसएस से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद कुछ लोगों ने उन्हें भाजपा और आरएसएस के इशारे पर काम करने वाला बताकर दुष्प्रचार किया। मरांडी के अनुसार, इस तरह के आरोपों और लगातार प्रताड़ना ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के संरक्षण में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ग्रामीणों की जमीन लूटी जा रही है। थाना, अंचल कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जमीन लूट के मामलों में कार्रवाई नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। निशा भगत की मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

निशा भगत के पिता हंडू भगत कहते हैं, “इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है; इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनका जिक्र फेसबुक लाइव सत्रों के दौरान किया गया था। हम CBI जांच की मांग करते हैं। हम चाहते हैं कि प्रशासन इस जांच के जरिए दोषियों को पकड़े। इससे उन लोगों का हौसला बढ़ेगा जो समाज की बेहतरी के लिए खुलकर काम करना चाहते हैं। झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है, फिर भी यहाँ आदिवासियों की जमीन और संपत्तियों को तेजी से लूटा जा रहा है, जबकि हेमंत सोरेन सरकार सिर्फ तमाशबीन बनी हुई है। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

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वे आगे कहते हैं, "निशा जमीन माफियाओं, बिचौलियों और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ लड़ रही थी। वह समाज और राज्य के उत्थान के लिए एक नई सोच के साथ काम कर रही थी; वह राज्य में एक नई जागृति लाना चाहती थी। अगर प्रशासन ने समय रहते मदद की होती, तो आज हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता। उसे इतना भयानक प्रताड़ित किया गया कि इतनी साहसी, तेज-तर्रार और जोशीली युवती का हौसला टूट गया। मुख्यमंत्री से क्या ही अपील की जाए? पूरा राज्य आक्रोश में है। भले ही निशा भगत हमारी बेटी थी, लेकिन राज्य के लोगों ने उसे अपना मान लिया है और वे भी इस संघर्ष में शामिल हो गए हैं।"

शव लेकर टावर चौक पहुंचे लोग
आदिवासी नेत्री निशा भगत को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शनिवार को बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे। निशा भगत के शव के साथ लोग टावर चौक पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर झारखंड सरकार से न्याय की मांग की। बैनर में निशा भगत की मौत को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपितों को गिरफ्तार करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान आक्रोश और एकजुटता का माहौल दिखा। इसके बाद शव को लेकर पुस्तैनी गांव चैनपुर प्रखंड के उरु गांव के लिए निकल गया। जहां अंत्येष्टि की जाएगी।

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