DESK: भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न होने पर पुराने मतदाता भी फॉर्म-6 भर सकते हैं। इससे वे दोबारा नाम जुड़वाने का आवेदन कर सकेंगे। पहले से मतदाता होने के कारण इसे झूठी घोषाण नहीं माना जाएगा। केवल इस आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
दरअसल, फॉर्म-6 में घोषणा करनी होती है कि आवेदक पहली बार मतदाता बन रहा है। ऐसे में पुराने मतदाता मुकदमे के डर से फॉर्म नहीं भर रहे थे। आयोग ने कहा कि आवेदन करने वाले का नाम किसी दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज नहीं होना चाहिए। बाकी जानकारी भी सही होनी चाहिए। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल में कहा था कि पुराने वोटर का डर गलत है। वे फॉर्म-6 भर सकते है। आवेदन पर कानून के अनुसार फैसला होगा।
विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के बीच चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में शामिल हो सकें। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे अपने पत्र में चुनाव आयोग ने ‘फॉर्म-6’ जमा करने का जिक्र करते हुए यह बात कही।
चुनाव आयोग ने बताया कि उसे जानकारी मिली है कि कुछ ऐसे मतदाता, जिनका नाम मौजूदा ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के दौरान प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं है, वे ‘फॉर्म-6’ जमा करने में हिचकिचा रहे हैं। इसका कारण यह है कि इन मतदाताओं को ‘फॉर्म-6’ में एक घोषणा-पत्र भी देना होता है। जिसमें यह बताना होता है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है।
इसमें कहा गया है कि ऐसे मतदाता मानते हैं कि पहले से नामांकित होने के बावजूद फॉर्म 6 जमा करना एक तरह से ‘गलत घोषणा’ (false declaration) करना होगा। इससे वे ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ (Representation of the People Act, 1950) की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में दी जाने वाली घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। आयोग ने बताया कि यदि किसी मतदाता का नाम ‘ड्राफ्ट मतदाता सूची’ (draft electoral roll) में नहीं है तो वह निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ‘अंतिम मतदाता सूची’ में अपना नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकता है।
आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में फॉर्म 6 जमा करने का उद्देश्य केवल मतदाता सूची में नाम शामिल कराना है (चाहे वह SIR प्रक्रिया के दौरान हो या उसके बाद)। केवल इसलिए कि मतदाता पहले से नामांकित था, इस फॉर्म को ‘गलत घोषणा’ नहीं माना जाएगा।
चुनाव आयोग ने कहा कि ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 31 के तहत, कोई भी ‘निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी’ (ERO) किसी मतदाता के खिलाफ केवल इस आधार पर कार्रवाई नहीं करेगा कि वह पहले भी मतदाता सूची में शामिल था और उसने SIR प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद फॉर्म 6 जमा किया है। बशर्ते वह मतदाता किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में पहले से नामांकित न हो और उसके द्वारा दी गई घोषणा कानून के अनुसार सही हो।
चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस स्पष्टीकरण को सभी संबंधित लोगों तक पहुंचाएं। साथ ही, जनहित में इसे स्थानीय भाषाओं में और अपने क्षेत्र के उपलब्ध मीडिया माध्यमों के जरिए व्यापक रूप से प्रचारित करें। मतदाता सूची में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 का उपयोग किया जाता है।







