रांची: हेमंत आंसू छुपा रहे हैं … मां नहीं रहीं..राज्यपाल बगल में बैठे हैं… दाईं और चंपाई सोरेन हैं…सुदेश को देखते ही गले लगा लिया….और फिर आंसू निकल गए… हेमंत सोरेन ने 13 महीने पहले पिता को मुखाग्नि दी..अब मां रुपी सोरेन को कंधा दे रहे हैं… मृत्य ही अंतिम सत्य है लेकिन इस सत्य के बीच इतना कम फासला होगा सोच–सोच हेमंत रो दे रहे हैं… परिजनों को बिलखता देख खुद को नहीं रोक पा रहे…।
किसी और आंखों में आंसू देखते हैं तो खुद फफक पड़ते हैं…दर्जनों कैमरों की लेंसों के बीच हेमंत अपनी आंखों के उस सैलाब को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं जिसे देखने के बाद ..कभी उनकी मां रुपी सोरेन सौ सवाल पूछतीं होंगी…क्या हुआ.. किसी ने डांटा…गिर गए..चोट लगी… किसी ने कुछ कहा.. फिर दुलारती होंगी.. हेमंत सोरेन मां की गोद में सिर रखते होंगे और फिर झारखंड की कहानियां सुन सो जाते होंगे…पिता जंगलों में भटक रहे थे…आंदोलनों में व्यस्त मां ही तो थी जिन्होंने उस दौर में परिवार को संभाला जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड के दुश्मनों के वांटेड थे…।

मां नहीं रहीं। हेमंत कंधा दे रहे हैं परिवार के लोग पीछे हैं..हेमंत आगे.. हेमंत सोरेन के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी है…अब वो मां से पूछो कह कर जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते…। एक और यात्रा नेमरा की ओर निकल चुकी है । रांची के मोरहाबादी के इसी घर से पिता को लेकर अंतिम बार निकले थे हेमंत सोरेन नेमरा की ओर…अभी एक महीने पहले पहली बरसी मना कर नेमरा से लौटे ही थे कि फिर उस गांव की ओर जा रहे हैं जहां रुपी सोरेन बहू बनकर आईं थीं… शिबू सोरेन की पत्नी..छोटे से गांव में जब कोई नहीं जाता..रास्ता तक नहीं था ..जंगलों से घिरा.. शिबू सोरेन के परिवार को संभालते–संभालते रुपी सोरेन तमाम मुश्किलों को सहती हुईं.. अडिग रहीं…पति के आंदोलनों की साक्षी….सियासी दांव–पेंच…राजनीतिक मुश्किलों और साजिशों के झंझावात से बच्चों और परिवार को बचाती हुईं..बड़े बेटे दुर्गा सोरेन के असमय जाने के शोक को सहती हुईं… वो हेमंत के दौर और झारखंड के समय की साक्षी रहीं ।
हेमंत सोरेन मां को उस अनंत यात्रा की ओर ले जा रहे हैं जहां से कोई वापस नहीं आ सका…नेमरा में उसी मिट्टी में उनकी मां रुपी सोरेन की अस्थियां विसर्जित हो जाएंगी…जिस मिट्टी में उनके पुरखों का वजूद कायम है… मृत्यु अंतिम सत्य है मगर फासला इतना कम होगा…यही सोच हेमंत की आंखें बहने लगती हैं… चंद दिनों पहले अपने अजीज और झारखंड के मंत्री सुदिव्य सोनू को कंधा दिया…इससे पहले कैबिनेट मंत्री रामदास सोरेन का साथ छूटा और अब रुपी सोरेन भी नहीं रहीं…हेमंत के पास इस मुश्किल दौर की कहानी बताने के लिए आंसुओं के सिवा कुछ और नहीं… ।





