लातेहार : वन अधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू कराने और वन आश्रित समुदाय को जमीन पर अधिकार दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को आदिवासी समाज के लोगों ने वन विभाग कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। झारखंड जनाधिकार महासभा की लातेहार इकाई के नेतृत्व में आयोजित घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन में जिले के 10 प्रखंडों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर ही चूल्हा-चौकी, राशन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था कर ली है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बावजूद वन आश्रित परिवारों को उनके दावों का लाभ नहीं मिल रहा है। महासभा ने लंबित दावों के शीघ्र निपटारे और पात्र परिवारों को वन अधिकार पट्टा देने की मांग उठाई है।



भीख नहीं, संवैधानिक अधिकार मांग रहे
महासभा के फादर जार्ज मोनोपॉली ने कहा कि वन पर निर्भर समुदाय अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। कानून का सही तरीके से पालन होगा तो हजारों परिवारों को न्याय मिल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कब्जे वाली वन भूमि पर वनरोपण के नाम पर कार्रवाई की जा रही है और लोगों को हटाने का प्रयास हो रहा है। शांतिपूर्ण विरोध करने वालों पर मुकदमे दर्ज करने का भी आरोप लगाया। सेलेस्टीन कुजूर ने कहा कि हम सरकार से कोई खैरात नहीं, अपना संवैधानिक अधिकार मांगने आए हैं। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत वन अधिकार के करीब 1750 और सामुदायिक वन अधिकार के लगभग 250 दावे लंबित हैं। महासभा के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में एक भी वन अधिकार पट्टा जारी नहीं हुआ। आंदोलनकारियों ने कहा कि पिछले वर्ष छह अक्टूबर को भी इसी मांग को लेकर धरना दिया गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इस बार मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है। धरना स्थल पर जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव, रघुपाल सिंह, मुनेश्वर उरांव, नंदकिशोर गंझू, हरि कुमार भगत, कन्हाई सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।




