पटना: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सामने आए विवाद ने राजनीतिक बहस के साथ आम लोगों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दो चुनाव आयुक्तों की ओर से प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर आपत्तियां उठाए जाने की रिपोर्ट के बाद SIR को लेकर चर्चा तेज हुई है।

इसी बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इस मामले में इस्तेमाल की जा रही भाषा उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मामले की जांच का अधिकार है, उन्हें इसकी पड़ताल करनी चाहिए।


दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कई मौकों पर प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे।रिपोर्ट में ERONET डेटाबेस के केंद्रीकरण, Form 6 में बदलाव और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने से जुड़े फैसलों का उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से जवाबदेही और प्रक्रिया की समीक्षा की मांग तेज हुई है।
ECI ने कहा- अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि बहुसदस्यीय आयोग में तकनीकी नोट और सवाल उठना सामान्य विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा है।आयोग के अनुसार SIR समेत सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यानी एक तरफ रिपोर्ट में आंतरिक आपत्तियों का जिक्र है, तो दूसरी तरफ आयोग अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है।
अब जनता के सामने साफ तस्वीर आना जरूरी
SIR मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी विवाद का सीधा असर मतदाताओं के भरोसे पर पड़ सकता है। ऐसे में अलग-अलग दावों और प्रतिक्रियाओं के बीच आम लोगों में भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है।इस स्थिति में चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया, उठाई गई आपत्तियों और अंतिम फैसलों की स्थिति पर स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
कुशवाहा बोले- मतभेद हों तो अधिकृत स्तर पर हो जांच
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच किसी मुद्दे पर अलग राय हो सकती है, लेकिन मामले को लेकर उचित प्रक्रिया के तहत ही सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने संबंधित विषय को सक्षम प्राधिकरण के स्तर पर देखने की बात कही।
SIR पर सवालों के बीच स्पष्टीकरण से दूर हो सकता है कन्फ्यूजन
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और चुनाव आयोग की सफाई दोनों सामने हैं। ऐसे में जनता के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि वास्तविक प्रक्रिया क्या रही, आपत्तियां किन बिंदुओं पर थीं और अंतिम निर्णय किस तरह लिए गए।इन बिंदुओं पर चुनाव आयोग की विस्तृत और स्पष्ट जानकारी सामने आने से मौजूदा भ्रम की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।





