रांचीः झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस कैडर के तीन प्रधान जिला जज व सत्र न्यायाधीश (पीडीजे) को झारखंड हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की गयी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गढ़वा के पीडीजे मनोज प्रसाद, साहिबगंज के पीडीजे अखिल कुमार और डालटनगंज के पीडीजे राम शर्मा को झारखंड हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाये जाने की अनुशंसा की है। कॉलेजियम की बैठक चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई। प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए कॉलेजियम ने उक्त तीनों न्यायिक अधिकारियों को झारखंड हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाये जाने की अनुशंसा की है। झारखंड हाईकोर्ट में वर्तमान में चीफ जस्टिस एमएस सोनक सहित 13 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत पद 25 हैं।
मनोज प्रसाद
मनोज प्रसाद का जन्म 1973 में देवघर में हुआ था। इन्होंने सेंट फ्रांसिस स्कूल, देवघर से स्कूली शिक्षा पूरी की। इन्होंने 1988 में आइसीएसई बोर्ड से 10वीं की परीक्षा और 1990 में बीआइईसी (पटना कालेज) से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। इन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।1998 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस ला सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 1999 में बिहार स्टेट बार काउंसिल में वकील के तौर पर नामांकित हुए और मुख्य रूप से देवघर की जिला कोर्ट में सिविल मामलों की वकालत की। चार मई 2012 को एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर रांची के तौर पर झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए।
राम शर्मा
इनका जन्म सात जुलाई, 1968 को दिल्ली में हुआ था। इन्होंने 1984 और 1986 में सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंडरी एजुकेशन से क्रमशः मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। 1994 में दिल्ली से एलएलबी की परीक्षा पास की। 1994 में दिल्ली बार काउंसिल में वकील के तौर पर नामांकित हुए और दिल्ली हाई कोर्ट तथा दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों में सिविल और क्रिमिनल मामलों की वकालत की। 26 मई, 2012 को झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए।
अखिल कुमार
इनका जन्म छह जनवरी 1972 को पटना, बिहार में हुआ था। इनकी शुरुआती शिक्षा इनके गृह नगर में ही पूरी हुई। इन्होंने 1986 में मैट्रिक की परीक्षा पास की, जिसके बाद पटना कालेज से 1988 में इंटरमीडिएट किया। इसके बाद पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज से समाजशास्त्र में आनर्स के साथ ग्रेजुएशन किया और 1999 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस ला सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। 1999 में एक वकील के तौर पर नामांकित हुए और पटना हाई कोर्ट तथा पटना जिला कोर्ट में सिविल और क्रिमिनल मामलों की वकालत की।






