डेस्कः शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू ने दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से शिक्षकों को सम्मानित किया। देश भर के 48 चयनित शिक्षकों को राष्ट्रपति ने पुरस्कृत किया उनमें धनबाद के राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य भी शामिल थी। चयनित शिक्षकों में शामिल मुनमुन को प्रशस्ति पत्र, शाल एवं 50 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।
सीमित संसाधनों और सरकारी व्यवस्था की पुरानी छवि में सुधार लाते हुए मुनमुन भट्टाचार्य ने शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रचा है। उनके नवाचारों और अथक प्रयासों ने इस साधारण से सरकारी स्कूल को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट शिक्षण संस्था के रूप में स्थापित कर दिया है।


सतत विकास लक्ष्यों को शिक्षा से जोड़ने पर जोर
विद्यालय में किये जा रहे नवाचारों के बारे में उन्होंने बताया कि बच्चों को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन सहित पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता जैसे विषयों को बच्चों की शिक्षा का हिस्सा बनाया जा रहा है।
उनका कहना है कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
LIVE: President Droupadi Murmu’s address at the presentation of National Awards to teachers on the occasion of Teachers’ Day in New Delhi https://t.co/obyhWUyeC3
— President of India (@rashtrapatibhvn) September 5, 2026
कबाड़ से तैयार होती है शिक्षण सामग्री
मुनमुन भट्टाचार्य के अनुसार, विद्यालय में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ाने का प्रयास किया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप कम लागत और बिना लागत वाली शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। बेकार पड़े सामान से उपयोगी शिक्षण सामग्री तैयार कर बच्चों को पढ़ाया जाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चे अपने आसपास के वातावरण और रोजमर्रा के अनुभवों से भी सीखते हैं। इसलिए शिक्षण को उनके परिवेश से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
धनबाद में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना चुनौती
मुनमुन भट्टाचार्य ने कहा कि धनबाद खनन क्षेत्र है और यहां बच्चों की शिक्षा के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ बच्चों के पढ़ाई छोड़ने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में बच्चों को लगातार विद्यालय और शिक्षा से जोड़े रखना महत्वपूर्ण है। इसके लिए उनकी पढ़ाई को स्थानीय परिवेश और जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है।
माध्यमिक स्तर तक छात्राओं की पढ़ाई जारी रखना जरूरी
उन्होंने छात्राओं की शिक्षा को लेकर भी चिंता जतायी। उनके अनुसार, प्राथमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन अपेक्षाकृत बेहतर रहता है, लेकिन माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर पहुंचने के साथ इसमें गिरावट देखने को मिलती है। इसलिए केवल प्राथमिक स्तर पर नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। छात्राओं को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक लगातार शिक्षा से जोड़ना जरूरी है।
शिक्षक-अभिभावक की साझेदारी से बेहतर होगा भविष्य
मुनमुन भट्टाचार्य के अनुसार, बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षक और अभिभावक दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के साथ बच्चों के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश को समझना भी जरूरी है। संसाधन सीमित होने के बावजूद सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास से बच्चों को बेहतर दिशा दी जा सकती है।




